‘अकल्पनीय है जज की नियुक्ति पर रोक’

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जजों की नियुक्ति को लेकर मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा और इंदिरा जयसिंह के बीच जमकर बहस हुई| दरअसल, इंदिरा जयसिंह ने सुप्रीम कोर्ट से इंदु मल्होत्रा की नियुक्ति को रोकने को कहा था, जिसके बाद सीजेआई और उनमें काफी तीखी बहस देखने को मिली| हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने जज के रूप में नियुक्ति संबंधी वारंट पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है|

मुख्य न्यायाधीश ने इंदिरा जयसिंह से कहा कि आप कठुआ मामले को लेकर आईं तो हमें इस मामले में आपकी गंभीरता का अंदाजा हुआ, लेकिन अब आप एक महिला जज की ही नियुक्ति का विरोध कर रही हैं| चीफ जस्टिस ने कहा-आपके बीच की महिला वकील सुप्रीम कोर्ट की जज बन रही है और आप इसे रोकने को कह रही हैं?

इस पर इंदिरा जयसिंह ने कहा कि हम इंदु मल्होत्रा के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन चाहते हैं कि जस्टिस जोसफ का नाम क्लियर होने तक इसे रोका जाए| चीफ जस्टिस ने तेज आवाज में कहा कि ये क्या बात है? हमने अगर 30 नाम की सिफारिश की है और सरकार ने कुछ नाम क्लियर नहीं किए, तो आप क्या चाहती हैं कि सभी को रोक दिया जाए| चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने वकील इंदिरा जयसिंह की याचिका को ‘अकल्पनीय’ बताते हुए कहा कि ऐसा पहले कभी नहीं सुना गया है|

सीनियर वकील इंदिरा जयसिंह ने अपनी याचिका में कहा कि कॉलिजियम की सिफारिश के बावजूद केंद्र सरकार ने केएम जोसेफ को सुप्रीम कोर्ट को जज तौर पर नियुक्ति करने से इनकार कर दिया है| केंद्र सरकार ने इंदु मल्होत्रा को जज के तौर पर नियुक्त करते हुए कॉलिजियम को जस्टिस जोसेफ के नाम पर फिर से विचार करने के लिए कहा है| वकील इंदिरा जयसिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के 100 से ज्यादा वकीलों ने केंद्र सरकार के फैसले की आलोचना की है। जय सिंह ने कहा, ‘हमें इस बात की जानकारी है कि केंद्र सरकार ने जस्टिस केएम जोसफ  के नाम को तवज्जो क्यों नहीं दी| ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि जस्टिस जोसेफ ने केंद्र के उत्तराखंड के राष्ट्रपति शासन के फैसले को खारिज कर दिया था|’

बता दें कि  2016  में केंद्र सरकार ने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाया था, जिसे उत्तराखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस केएम जोसेफ ने खारिज कर दिया था| इसके बाद राज्य में कांग्रेस की सरकार फिर से बहाल हो गई थी|

इस मामले में सियासी गलियारों में भी खूब शोर है| कांग्रेस के साथ वामदलों ने गुरुवार को इसे न्यायापालिका में हस्तक्षेप करार दिया और केंद्र सरकार पर हमला बोला| कांग्रेस के नेता कपिल सिब्बल ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस जोसेफ को सुप्रीम कोर्ट नहीं भेजने पर केंद्र को आड़े हाथों लिया| दुसरी तरफ केंद्र सरकार ने पलटवार करते हुए सभी आरोपों को सिरे से ख़ारिज किया है|  केंद्र सरकार ने इंदु मल्होत्रा के नाम को मंजूरी दे दी, लेकिन जस्टिस जोसेफ के नाम को लंबित रखा| सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के कॉलिजियम से कहा कि जस्टिस जोसेफ को शीर्ष अदालत में पदोन्नत करने की अपनी सिफारिश पर दोबारा विचार करें| इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जजों के नाम को पुनर्विचार के लिए भेजना सरकार का अधिकार है और कोर्ट इस पर विचार करेगा|

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