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वशिष्ठ बाबू के अपमान पर लालू ने नितीश पर कसा तंज

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बिहार के महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह (Mathematician Vashisth Narayan Singh) का पीएमसीएच (PMCH) में कल निधन हो गया था। वशिष्ठ नारायण सिंह की मौत के बाद पटना के पीएमसीएच प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई थी. वशिष्ठ नारायण के निधन के बाद अस्पताल प्रबंधन द्वारा उनके परिजनों को शव (Dead Body) ले जाने के लिए एंबुलेंस (Ambulance) तक उपलब्ध नहीं कराया गया था। एंबुलेंस के इंतज़ार में शव 2 घंटे तक अस्पताल के बाहर पड़ा रहा था। इस महान विभूति के निधन के बाद उनके छोटे भाई ब्लड बैंक के बाहर शव के साथ खड़े रहे थे। वशिष्ठ नारायण जी का अंतिम संस्कार आज शुक्रवार को उनके पैतृक गांव भोजपुर (Bhojpur) जिले के बसंतपुर में राजकीय सम्मान के साथ कर दिया गय. इस मौके पर भारी संख्या में श्रद्धांजलि देने वालों की भीड़ उमड़ी और नम आंखों से उन्हें विदाई दी गई.

अस्पताल प्रबंधन द्वारा वशिष्ठ नारायण के निधन के बाद की गई लापरवाही की खबर जब लोगों को लगी तो उन्होंने इसकी घोर आलोचना की सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी वायरल हुआ था जिसमे वशिष्ठ नारायण जी के शव के साथ उनके छोटे भाई खड़े हुए दिख रहे है। इस शर्मनाक घटना पर लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) ने भी नितीश कुमार ( Nitish Kumar) पर निशाना साधा है। उन्होंने एक के बाद एक तीन ट्वीट किए हैं. उन्होंने पहले ट्वीट में लिखा”कल बिहार गौरव और हमारी सांझी धरोहर महान गणितज्ञ आदरणीय डॉ. वशिष्ठ नारायण सिंह जी के निधन की ख़बर सुनकर बहुत दुःख हुआ. मौत सबको एक ना एक दिन आनी ही है लेकिन मरणोपरंत जिस प्रकार उनके पार्थिव शरीर के साथ असंवेदनशील नीतीश सरकार द्वारा जो अमर्यादित सलूक किया गया वह अतिनिंदनीय है.”

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इसके बाद उन्होंने अगला ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने लिखा “क्या बड़बोली डबल इंजन सरकार उस महान विभूति को एक ambulance तक प्रदान नहीं कर सकती थी? मीडिया में बदनामी होने के बाद क्या किसी के पार्थिव शरीर को सड़क बीच रोककर उसे श्र्द्धांजलि देना एक मुख्यमंत्री को शोभा देता है? क्या अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान CM उन्हें कभी देखने गए?”

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इसके बाद लालू यादव ने एक और ट्वीट किया जिसमें उन्होंने लिखा कि हमारे कार्यकाल में मैंने उनका अच्छे से अच्छे अस्पताल में इलाज करवाया. उनकी सेवा करने वाले पारिवारिक सदस्यों को सरकारी नौकरी दी, ताकि वो पटना में उनकी अच्छे से देखभाल कर सकें.

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-Mradul tripathi

 

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