मौत तक काटनी होगी सज़ा

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गुजरात उच्च न्यायालय में नरोदा पाटिया दंगे के मामले बड़ा फैसला सुनाया है| मामले में बजरंग दल के पूर्व नेता बाबू बजरंगी की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा गया है वहीं पूर्व मंत्री माया कोडनानी को निर्दोष करार देते हुए बरी कर दिया | इनके साथ ही कोर्ट ने हरीश छारा और सुरेश लांगड़ा को दोषी करार दिया है|

मामले पर अगस्त 2012 में एसआईटी की विशेष अदालत ने राज्य की पूर्व मंत्री और भाजपा नेता माया कोडनानी सहित 32 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी| इसके बाद सभी आरोपियों ने अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी|

महिला एवं बाल कल्याण राज्यमंत्री रहीं माया कोननानी को नरोदा पाटिया मामले में गिरफ्तारी के बाद अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था| कोडनानी पर आरोप था कि उन्होंने दंगाइयों को मुस्लिम बस्तियों में हमले के लिए अपने भाषण के जरिये उकसाया है| इसमें मुस्लिम समुदाय के 11 लोगों की मौत हो गई थी|

गौरतलब है कि 26 फरवरी, 2002 को साबरमती एक्सप्रेस के गोधरा स्टेशन पहुंचने पर उस बोगी में आग लगा दी गई थी, जिसमें अयोध्या से लौट रहे 57 कारसेवक सवार थे| इस घटना के बाद पूरे गुजरात में माहौल खराब हो गया था| इसके बाद 28 फरवरी, 2002 को अहमदाबाद के नरोदा पाटिया में दंगा हुआ, जिसमें 97 लोग मारे गए थे|

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