रूसी मिसाइल डिफेंस सिस्टम डील रोकने पर…

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भारत और रुस बीते कई दशकों से रक्षा के कारोबार में एक-दूसरे का साथ देते रहे हैं| आज़ादी के बाद भारत ने रक्षा के क्षेत्र में कई नए मुक़ाम हासिल किए हैं, जिनमें रुस का भी योगदान रहा है| अब भारत और रुस के बीच एक और महत्वपूर्ण डील होने की संभावना है, लेकिन अमरीका इसे रोकने की पुरजोर कोशिश कर रहा है|

भारत को रुस से एस-400 की डील को अंजाम देने से रोकने के लिए अमरीका उसे अपने बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस ऑप्शंस चुनने के लिए राजी करने की कोशिश कर सकता है| रुस से करीब 39,000 करोड़ रुपए के एस-400 सौदे को रोकने के लिए अमरीका भारत को किफायती दाम पर अपने बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदने के लिए मनाने की कोशिश कर सकता है|  गौरतलब है कि 6 जुलाई को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण अमरीकी शहर वाशिंगटन में रहेंगी, जहां इंडो-यूएस 2+2 डायलॉग होने जा रहा है|

इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, इस बात की प्रबल संभावना है कि इस दौरान टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस (THAAD) सिस्टम के बारे में बातचीत हो| यह एक ऐसा उन्नत मिसाइल डिफेंस सिस्टम है, जो लॉन्ग रेंज के मिसाइल के हमले को रोकने में खासतौर से प्रभावी है|

दूसरी तरफ, रुस का एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम बड़े हवाई हमलों, खासकर एफ-18 और एफ-35 जैसे लड़ाकू विमानों से होने वाले हमलों को रोकने में कारगर है| रुस में बने एस-400 के नवीनतम संस्करण से भी लॉन्ग रेंज के हमलों को रोका जा सकता है, लेकिन इस बात पर विचार करना है कि इंटरमीडिएट और इंटरकांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल के खिलाफ क्या यह अमरीकी THAAD से ज्यादा प्रभावी है|

रुस से यह सौदा करीब 39,000 करोड़ का हो सकता है और इसे रोकने के लिए ऐसा लगता है कि ट्रंप प्रशासन सक्रिय हो गया है| यह सौदा अमरीका के लिए राजनीतिक रूप से काफी संवेदनशील हो गया है| अमरीकी कांग्रेस में एक विधेयक पर बहस हो रही है, जिसका उद्देश्य अमरीकी रक्षा कंपनियों पर प्रतिबंध लगाना है| यही नहीं, इन कंपनियों से खरीदारी करने वाली दूसरे देशों की कंपनियों को भी इस प्रतिबंध में शामिल करने का प्रस्ताव है|

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