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बच्ची को मासिक धर्म आया तो लगाई फांसी

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दिल्ली के बुराड़ी क्षेत्र के संतनगर में हुआ ह्त्याकांड तो आपको याद ही होगा| इस ह्त्याकाण्ड में सुबह-सुबह एक परिवार के 11 सदस्य संदिग्ध हालत में घर में मृत मिले थे, जिनमें सात महिलाएं और चार पुरुष शामिल हैं| जांच में एक रजिस्टर मिला था, जिसमें आलौकिक शक्तियां, मोक्ष के लिए मौत ही एक द्वार और आत्मा का अध्यात्म से रिश्ता जैसी अजीबोगरीब बातें लिखी हुई हैं| रजिस्टर में लिखा है कि मोक्ष प्राप्त करना है तो जीवन त्यागना होगा और मौत को गले लगाना होगा| तब माना गया था कि अंधविश्वास के कारण उन्होंने खुदकुशी कर ली थी| अब इसी क्षेत्र से एक बच्ची की खुदकुशी (Delhi Girl Suicide For Period Problems Trouble ) का मामला सामने आया है|

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दरअसल, बुराड़ी इलाके के संत नगर में ही पहली बार मासिक धर्म (Delhi Girl Suicide For Period Problems Trouble )  आने से परेशान एक 12 साल की बच्ची ने गुरुवार शाम फांसी का फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली थी । उसे इस संबंध में ज्ञान नहीं था, इसलिए वह घबरा गई थी|

पुलिस के अनुसार, बच्ची परिवार के साथ संत नगर में रहती थी। वह स्थानीय पब्लिक स्कूल में पांचवीं कक्षा की छात्रा थी। परिजन के मुताबिक, गुरुवार शाम को वह अपने कमरे में अकेली थी। इसी दौरान उसने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया और चुन्नी का फंदा बनाकर पंखे से लटककर खुदकुशी (Delhi Girl Suicide For Period Problems Trouble )  कर ली। थोड़ी देर बाद परिजन को घटना की जानकारी मिली तो उनके होश उड़ गए। परिजनों ने आननफानन में दरवाजा तोड़कर बच्ची को फंदे से उतारा और अस्पताल ले गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मौके पर जांच पड़ताल की।

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वहीं, बच्ची की बड़ी बहन ने पुलिस को बताया कि दो दिन पहले उसे पहली बार मासिक धर्म (Delhi Girl Suicide For Period Problems Trouble ) आया था। इससे वह तनाव में आ गई थी। हालांकि, बड़ी बहन ने उसे बहुत समझाया, लेकिन उसकी परेशानी कम नहीं हुई। परिवार का कहना है कि इसी वजह से बच्ची ने खुदकुशी कर ली। बच्ची के कमरे से कोई सुसाइट नोट नहीं मिला।

सर गंगाराम अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉक्टर राजीव मेहता ने बताया, “पहले 13 से 14 साल की उम्र में किशोरियों के शरीर में बदलाव (menstruation and hanged)  देखने को मिलते थे। ये बदलाव अब 11 से 12 साल में होने लगे हैं। इस उम्र में बच्चियां इन बदलावों के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं होती हैं। इस बारे में बच्चियों को पहले से जानकारी देना ज़रूरी है, ताकि वे इसके लिए मानसिक रूप से तैयार हो सकें।“

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