शाहीन बाग़ मामलें में कोर्ट ने दिया सरकार को नोटिस

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शाहीन बाग़ मामलें में जहा सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court Gives Notice) सरकार को आड़े हाथों ले रही है वहीं आज जामिया के स्टूडेंट CAA के विरोध में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं| CAA के विरोध में शाहीन बाग़ की सड़क पर चल रहा विद्रोह अब सुप्रीम कोर्ट में पहुंच चुका है। नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) के विरोध में कई दिनों से दक्षिण दिल्ली के शाहीन बाग (Shaheen Bagh) में चल रहे प्रदर्शन के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सोमवार को सुनवाई हुई। जस्टिस एस के कौल और जस्टिस के एम जोसेफ की पीठ ने टिप्पणी की, कि 15 दिसंबर से इस सड़क पर प्रदर्शन किया जा रहा है। विरोध करना ठीक है, लेकिन सार्वजनिक (Supreme Court Gives Notice) सड़क पर प्रदर्शन ठीक नहीं है सड़क को रोककर जनता को परेशानी में डालना उचित नहीं हैं। इतना ही नहीं शाहीन बाग़ विरोध (Shaheen Bagh Protest) प्रदर्शन के बीच चार महीने के बच्चे की मौत के मामले में भी दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है।

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शाहीन बाग़ मामलें में कोर्ट ने दिया सरकार को नोटिस

शाहीन बाग़ मामलें में कोर्ट ने दिया सरकार को नोटिस शाहीन बाग़ मामलें में जहा सुप्रीम कोर्ट सरकार को आड़े हाथों ले रही है वही आज जामिया के स्टूडेंट CAA के विरोध में जंतर मंतर पर प्रदर्शन #CAAProtest #ShaheenBagh #JamiaMilliaIslamia #JantarMantar

Talented India News द्वारा इस दिन पोस्ट की गई सोमवार, 10 फ़रवरी 2020

अगली सुनवाई 17 फरवरी को

सुनवाई के दौरान कोर्ट (Supreme Court Gives Notice) ने दिल्ली सरकार (Delhi Government) और दिल्ली पुलिस (Delhi Police) को नोटिस जारी किया है। इसी के साथ कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार करते हुए अगली सुनवाई के लिए 17 फरवरी की तारीख तय की है। शाहीन बाग (Shaheen Bagh Protest) में विरोध प्रदर्शन करने वालों को आड़े हाथ लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि, प्रदर्शन के लिए सड़क जाम नहीं कर सकते, साथ ही यह भी कहा कि सार्वजनिक स्थल पर अनिश्चितकाल के लिए प्रदर्शन नहीं किया जा सकता है। अधिकारों का मतलब ये नहीं हैं कि आप दूसरों के लिए परेशानी पैदा करें।

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बच्चे की मौत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

दिल्ली के शाहीन बाग (Shaheen Bagh) इलाके में नागरिकता कानून (CAA) के खिलाफ 15 दिसम्बर से चल रहे विरोध (Supreme Court Gives Notice)  प्रदर्शन के बीच चार माह के एक मासूम की मौत हो गई थी। इस मौत पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराज़गी जताते हुए दिल्ली और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है|  बाल पुरस्कार विजेता जेन सदावर्टे ने सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखकर बताया था कि शाहीन बाग के विरोध प्रदर्शन में एक मां अपने चार महीने के बच्चे को लेकर रोज़ जाती थी और इस कड़ाके की सर्दी में वह मासूम खुले में रहने के कारण सर्दी लगने की वजह से मौत का शिकार हो गया।  इस पत्र के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वयं इस मौत के मामले को संज्ञान में लिया और दिल्ली सरकार और पुलिस को नोटिस जारी कर इस मामले की पूरी जानकारी मांगी है। इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने वकील से सख्त लहजे में पूछा, ‘क्या चार महीने का बच्चा खुद विरोध प्रदर्शन में गया था। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एसए बोबडे (Chief Justice Justice SA Bobde) ने ये भी आदेश दिया क़ि इस मामले में जिसको भी अपनी बात कहनी है वह न्यायलय में याचिका दाखिल करें उसके बाद ही कोर्ट इस पर सुनवाई करेगी। वैसे दिल्ली में चल रहे इस प्रदर्शन में विरोध कर रही 3 महिलाओं के वकील ने कोर्ट द्वारा 4 महीने के बच्चे की मौत पर उठाये गए सवालों का जवाब देते हुए कोर्ट को एक नया तथ्य बताया। 3 महिलाओं के वकील शाहरुख आलम (Lawyer Shahrukh Aalam) ने न्यायधीश महोदय को बताया कि बच्चे की मौत विरोध प्रदर्शन में जाने के कारण हुई ही नहीं है। वो बच्ची एक झुग्गी बस्ती में रहती थी और कई दिनों से वो बीमार भी थी इसलिए उसकी  मौत सर्दी लगने और बीमार होने की वजह से हुई है, शाहीन बाग़ प्रदर्शन में आने से नहीं। वैसे ये पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में साफ नहीं है कि उसकी मौत कैसे हुई ?

जामिया का जंतर-मंतर पर प्रदर्शन

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) के विरोध में शाहीन बाग़ (Supreme Court Gives Notice) में चल रहे विरोध प्रदर्शन की आग को और भड़काने के लिए जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी (Jamia Millia Islamia) के विद्यार्थी भी उतर आए हैं। सरकार के बनाए इन दोनों कानूनों का विरोध (CAA Protest) करने के लिए जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों द्वारा जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया जा रहा हैं। जहां एक तरफ सुप्रीम कोर्ट ये निर्देश दे रही है की विरोध प्रदर्शन शांति पूर्ण होना चाहिए जिससे दूसरों को तकलीफ ना हो वहीं जामिया मिलिया द्वारा खुल कर सरकार के बनाये कानून का विरोध किया जा रहा है। आने वाले दिनों में ये प्रदर्शन शांति पूर्ण रहेगा अथवा आक्रोशित ये देखना दिलचस्प होगा। लेकिन फ़िलहाल सरकार कानून बदलने के मूड में तो नहीं हैं।

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Prabhat Jain

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