सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज की

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सुप्रीम कोर्ट ने जज लोया की मौत के मामले में निष्पक्ष जांच को लेकर फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने जांच वाली मांग की याचिका को ठुकरा दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चार जजों के बयान पर संदेह का कोई कारण नहीं है। उनके बयान पर संदेह करना संस्थान पर संदेह करना जैसा है। कोर्ट ने इस याचिका में कोई तर्क नहीं पाया है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा,  जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने फैसला सुनाया है। आपको बता दें कि आज फैसला होना था कि लोया की मौत की जांच एसआईटी से कराई जाए या नहीं।

महाराष्ट्र सरकार ने किया था विरोध

इससे पहले मामले की सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील और पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने दलील दी थी कि याचिकाकर्ता सिर्फ इस मामले को तूल देना चाहते हैं। यह जज, पुलिस, डॉक्टर सहित सभी की मिलीभगत रही है। रोहतगी ने जज लोया की मौत को लेकर संदेह जताने वाली खबरों को झूठा बताया था।

कौन है याचिकाकर्ता

इस मामले में कांग्रेस नेता तहसीन पूनावाला, महाराष्ट्र के पत्रकार बीएस लोने, मुंबई लॉयर्स एसोसिएशन सहित अन्य द्वारा विशेष जज बीएच लोया की मौत की निष्पक्ष जांच की मांग की याचिकाएं दाखिल की थीं।

जानें क्या है मामला

2005 में सोहराबुद्दीन शेख और उसकी पत्नी कौसर बी को गुजरात पुलिस ने हैदराबाद से अगवा किया था। आरोप था कि दोनों को फर्जी मुठभेड़ में मार दिया गया था। शेख के साथ तुलसीराम प्रजापति को भी 2006 में गुजरात पुलिस द्वारा मार डाला गया था। उसे सोहराबुद्दीन मुठभेड़ का गवाह माना जा रहा था। 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल को महाराष्ट्र में ट्रांसफर कर दिया और 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने प्रजापति और शेख के केस को एक साथ जोड़ दिया। शुरुआत में जज जेटी उत्पत केस की सुनवाई कर रहे थे, लेकिन आरोपी अमित शाह के पेश न होने पर केस की सुनवाई जज बीएच लोया को सौंपी गई और उनकी मौत 1 दिसंबर 2014 में उनकी मौत हो गई।

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