ऐसी थी भय्यू  महाराज की ज़िंदगी

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मध्यप्रदेश के इंदौर में आध्यात्मिक गुरु भय्यू महाराज उर्फ़ उदयसिंह देशमुख ने अपने बंगले में खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली| भय्यू महाराज की आत्महत्या के पीछे कई सवाल खड़े हो गए हैं| इस हिला देने वाली ख़बर से भय्यू महाराज के भक्त और उनके समर्थक सकते में आ गए|

लोगों को जीने की राह दिखाना, सामाजिक कार्यों में लगे रहना, यह सब भय्यू महाराज के जीवन का हिस्सा था| आइए जानते हैं भय्यू महाराज के जीवन की कुछ यादों के बारे में –

मॉडल से संत बने भय्यू महाराज ‘सियाराम’ कंपनी के लिए मॉडलिंग भी कर चुके हैं| मॉडलिंग के समय वे बहुत ही ग्लैमरस और चार्मिंग पर्सनालिटी तथा बहुत विनम्र और संजीदा युवक थे, जिनकी आंखों में ढेरों सपने थे| एक सीमेंट कंपनी में उन्होंने जॉब भी की| कहा जाता है कि इसके बाद उन्हें कुछ इंट्यूशन होने लगे थे| वे किसी के बिना पूछे ही उसके बारे में बताने लगते और वह व्यक्ति अवाक रह जाता| तत्कालीन कलेक्टर इकबालसिंह बैंस को उन्होंने मुलाकात के दौरान कहा कि चंडीगढ़ में उनके पैतृक घर में एक नीली कार पोर्च में खड़ी है| बैंस साहब ने तुरंत फोन लगाकर घर पर पूछा तो बात सही निकली| इसके बाद तो कई घटनाक्रम हुए और उनकी ख्याति बढ़ने लगी|

इसके बाद उन्होंने इंदौर के सुखलिया में अपना आश्रम शुरू किया और अध्यात्म का ही मार्ग चुन लिया| उन्होंने ‘श्री सदगुरु दत्त धार्मिक एवं पारमार्थिक ट्रस्ट’ की स्थापना की, जिसके लंबे समय तक शरद पंवार ( भय्यू महाराज के रिश्ते में मौसाजी) ही अध्यक्ष रहे|  राष्ट्रवाद  को सर्वाधिक महत्व देते हुए उन्होंने धर्म और समाजसेवा का उपक्रम शुरू किया| देखते ही देखते उनके शिष्यों की संख्या तेजी से बढ़ती चली गई| वे अब आम और खास के लिए भय्यू महाराज बन चुके थे| कई बड़ी सेलिब्रिटीज़ उनके आश्रम में आने लगी, फिल्म जगत के सितारों से लेकर राजनीति की बड़ी हस्तियां उनसे जुड़ती चली गईं| पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा ताई पाटिल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से लेकर स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर तक उनके अनुयायी थे|

आरएसएस के मुख्यालय में वे दशहरे के प्रमुख उत्सव में अतिथि होते तो संघ प्रमुख मोहन भागवत भी उनके आश्रम में लगातार दस्तक देते| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात में मुख्यमंत्री रहने के दौरान किए गए अनशन को तुड़वाने भी वे गए| अन्ना हज़ारे का अनशन समाप्त करने के लिए भी उन्हें बुलाया गया| इतना ही नहीं, वे महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख भी उनके मुरीद थे| दरअसल, उनके चेहरे का तेज तो प्रभावित करने वाला था ही वहीं विचारों की मौलिकता और स्पष्टता भी लोगों को छू लेती थी| वे युवाओं के भी रोल मॉडल बन गए थे| तेज रफ़्तार कार चलाने का उनको खासा शौक था| महंगी, लक्ज़री गाड़ियों का तो उनको शौक था ही, उनका ड्रेसिंग सेन्स भी जबरदस्त था|

उन्होंने समाज के लिए, पर्यावरण के लिए कई कार्य किए| बच्चों के स्कूल से लेकर, गरीब बेटियों की शादी, किसानों ने लिए कई परियोजनाएं, जेलों में बंद कैदियों के परिवार की देखरेख, लावारिस शव का अंतिम संस्कार करवाना जैसे कई कार्य उनके दवारा संचालित किए जाते थे|

 

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