स्पेन से लौटे स्टूडेंट ने सरकारी सेंटर की वयवस्थाओं की पोल खोल दी

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Coronavirus जिसके नाम से ही अब लोग थर-थर कांप रहे हैं क्योंकि इसने पूरी दुनिया (Government Quarantine Center Arrangements) को अपनी चपेट में ले लिया है। चीन के वुहान (Coronavirus From China) में पनपने वाले इस वायरस (Coronavirus Outbreak) के बारे में शायद ही किसी ने ये अंदाजा लगाया हो कि आगे चलकर ये पूरी दुनिया में तबाही मचा देगा। सभी देशों के डॉक्टर्स लगातार इस पर शोध कर रहे हैं और इसकी दवा खोजने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि इतने रिसर्च और खोज के बाद भी अभी तक सभी के हाथ खाली हैं और कोरोना वायरस (Coronavirus Update) अपना शिकार करता जा रहा है। देश में भी लगातार मामले बढ़ रहे हैं। सरकार लोगों को जागरूक कर रही है। कई दिग्गज हस्तियां भी सरकार का सहयोग कर रहीं हैं। लोग भी सुरक्षा का ध्यान रख रहे हैं। फिर भी खतरा तो बना ही हुआ है। भारत सरकार लोगों को जागरूक भी कर रही है, इसका इलाज भी खोज रही है साथ ही विदेशों में फंसे अपने नागरिकों को वापस भी ला रही है। बाहर से जिन लोगों को भी लाया जा रहा है उन्हें क्वारंटाइन सेंटर में रखा जा रहा है। इन सेंटर्स में डॉक्टर्स की निगरानी में लोगों को रखा जा रहा है। ऐसा इसलिए ताकि विदेश से लौटे किसी व्यक्ति में संक्रमण हो तो वह दूसरों तक न फैले। स्क्रीनिंग और पूरी जांच प्रक्रिया होने पर 14 दिन के बाद इन लोगों को घर जाने की अनुमति दे दी जाती है। ये सेंटर सिर्फ विदेश से लौटने वाले लोगों के लिए नहीं बल्कि इस वायरस (Coronavirus India) से जो भी संक्रमित हो उनके लिए है, ताकि वे दूसरों के सम्पर्क में न आ सकें। राजधानी दिल्ली के नरेला में डीडीए फ्लैटों को क्वारंटाइन सेंटर में बदला गया है। ये फ्लैट 6 साल से बंद पड़े हुए हैं जिन्हे कोरोना वायरस के लिए इस्तेमाल में लाया गया है।

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क्यों बंद पड़े थे फ्लैट

बंद पड़े इन फ्लैट्स (Government Quarantine Center Arrangements) को दिल्ली विकास प्राधिकरण (Delhi Development Authority) ने तैयार किया था साल 2014 में। लेकिन बुनियादी सेवाएं पूरी न होने की वजह से इसे किसी ने नहीं खरीदा। जबकि इन फ्लैट्स को 4 बार आवासीय योजना में शामिल किया गया। 6 साल बाद आखिर ये फ्लैट्स कोरोना (Coronavirus Is Spreading) की वजह से सरकार के काम में आ गए। लेकिन सुविधाओं का क्या? पहले नहीं थी, अभी भी नहीं हैं। इन फ्लैट्स में न तो पानी है न ही साफ़-सफाई। फिलहाल इन फ्लैट्स में 250 लोगों को रखा गया है और सभी विदेश से लौटे हैं।

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व्यवस्थाओं की खुली पोल

विदेश से लौटे एक शख्स ने इस सेंटर (Government Quarantine Center Arrangements) का एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है। जिस शख्स ने वीडियो शेयर किया उसका नाम है मन शर्मा। मन शर्मा छात्र है, हाल ही में स्पेन से लौटा है। अपने वीडियो में मन ने बताया कि यहां पर ना तो पानी और ना ही हाथ धोने के लिए सेनेटाइजर की व्यवस्था है। इन सेंटर को लेकर सरकार कितने भी दावे कर ले लेकिन मन शर्मा के इस वीडियो ने सरकारी तंत्र की व्यवस्थाओं की धज्जियां उड़ा दीं। सिर्फ मन ही नहीं बल्कि स्पेन से लौटी एक अन्य युवती ने भी सरकार की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी। युवती ने बताया कि सेंटर पहुंचने से पहले उसे एयरपोर्ट ही काफी परेशानियां उठानी पड़ीं। युवती की मां ने ट्वीट कर अपनी बेटी को हुई परेशानियों के बारे में बताया। युवती की मां ने दावा किया कि उसकी बेटी सुबह 8.30 बजे दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंची, जहां उसे लगभग 5 घंटे तक रोक कर रखा गया। इस दौरान उसे पीने के लिए पानी तक नहीं दिया गया और एयरपोर्ट के स्टाफ का रवैया बेहद बेरुखा था। इतना ही नहीं स्टाफ के लोग विदेश से लौटे लोगों से कह रहे थे कि हमसे दूर रहो, तुम सब मरने वाले हो।

सेंटर की बदतर हालत

इसके बाद युवती की मां ने बताया कि तकरीबन दोपहर 3 बजे उनकी बेटी को एक बस (Government Quarantine Center Arrangements) में बैठकर नरेला सेंटर ले जाया गया जहां लिफ्ट की व्यवस्था नहीं थी। unhone कहा कि मेरी बेटी को भारी सामन उठा कर तीसरे माले तक जाना पड़ा। इसके बाद उसे जो कमरा रहने को दिया गया था उसकी हालत बेहद बदतर थी। युवती की मां का कहना है कि जिस कमरे में उनकी बेटी को रखा गया उसमे कोई जानवर भी नहीं रह सकता। युवती की मां के ट्वीट पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि इनके साथ बुरा हुआ। सरकार को व्यवस्था सुधारनी चाहिए। हालांकि बाद में महिला ने अपने ट्वीट को डिलीट कर अपने ट्विटर अकाउंट को प्रोटेक्ट मोड पर डाल दिया। खैर जो भी हो लेकिन दिल्ली सरकार के इस आइसोलेशन सेंटर की वयवस्थाओं की पोल खुल गई है।

दिल्ली का सबसे बड़ा कोरेन्टाइन सेंटर

नरेला में दिल्ली का सबसे बड़ा कोरेन्टाइन सेंटर बनाया गया है। वजह है इतने फ्लैट्स का खाली होना। इस सेंटर में तकरीबन 4 हजार लोगों को आसानी से रखा जा सकता है। फिलहाल अभी सिर्फ 250 लोग ही हैं। इस सेंटर में 250 से ज्यादा बेड भी तैयार कर लिए गए हैं। यहां डॉक्टर्स की कड़ी निगरानी में लोगों को 14 दिनों तक रखा जाएगा। सेंटर की देखरेख का जिम्मा डीएम के कंधों पर है। पश्चिमी दिल्ली के आयुक्त दीपक शिंदे का कहना है कि जिन लोगों को विदेश से लाया जाएगा उनके लिए इस सेंटर में व्यवस्था की गई है।

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Prabhat Jain

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