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Yamuna Expressway Accident : नींद की झपकी नहीं प्रशासन की चूक से हुई 29 मौत

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बस ड्राइवर की एक झपकी ने 29 परिवार को उजाड़ दिया, यमुना एक्सप्रेसवे (Yamuna Expressway accident) पर आगरा में हुए हादसे के बाद सभी की जुबान पर यही लाइन थी, लेकिन असलियत अब उजागर हुई है। आग की तरह फैली बस हादसे की सूचना से घरों में पहाड़ टूट गया। बस में ड्राइवर, कंडक्टर समेत 52 लोग सवार थे। आमतौर पर ऐसे मामलों में हम ड्राइवर की गलती को ही मुख्य वजह मानते हैं, लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता। जैसे इस बार नहीं हुआ है।

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  लापरवाही से हुआ हादसा

जानकारी के अनुसार, घटना के बाद से ही ड्राइवर को नींद की झपकी को हादसे का कारण बताया जा रहा था, लेकिन मौके पर पहुंचे आगरा-लखनऊ के रोडवेज अधिकारी इसे मानने को तैयार नहीं हैं। एक अधिकारी ने कहा कि ऐसा मुमकिन नहीं है कि जिस ड्राइवर ने टोल प्लाजा पर टैक्स चुकाया, टोल कर्मी से बात की और पैसों का लेन-देन किया हो और अगले पांच मिनट बाद उसे नींद की झपकी आ जाए। असल में यह मामला ओवरटेक का है। किसी दूसरी गाड़ी को ओवरटेक करने के चक्कर में यह हादसा हुआ है। ये हादसा हुआ था बस में स्पीड गर्वनर नहीं होने के कारण।

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स्पीड गर्वनर की कमी

जांच में यह बात सामने आई है कि बस में स्पीड गर्वनर नहीं लगा हुआ था। ऐसा कहा जा रहा है कि जब जनरथ बस सेवा शुरु की गई थी तो सभी जनरथ बसों में स्पीड गर्वनर लगाए गए थे, लेकिन जनरथ सेवा की जो बस हादसे का शिकार हुई है उसमे स्पीड गर्वनर नहीं लगा हुआ था, ऐसा कैसे हुआ ? क्या केवल एक ही बस में स्पीड गर्वनर नहीं लगा और वह हादसे का शिकार हो गई ? ऐसा नहीं है, अक्सर वाहनों की कमी के कारण बड़े हादसे होते हैं और प्रशासन द्वारा नियमित जांच भी नहीं की जाती। कई बार तो जांच के बाद भी वाहनों में खामियां निकल जाती हैं , क्योंकि जांच के नाम पर लापरवाहियां होती है।

सरकार की अनदेखी

यूपी रोडवेज में ड्राइवर के पद से रिटायर्ड केपी सिंह का कहना है कि जब बस में स्पीड गर्वनर लगा होता है तो उस बस को 90 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलाया जाता है, लेकिन एक्सप्रेसवे पर चलने वाली बहुत सारी बसों के स्पीड गर्वनर निकाल दिए गए हैं। रोडवेज को आईटी सेवाए देने वाली कंपनी में काम कर चुके आईटी एक्सपर्ट इमरान अली का कहना है कि जैसे ही सड़क पर बस चला रहा ड्राइवर जब-जब बस की स्पीड 90 से ऊपर ले जाता है तो यह डाटा कंट्रोल रूम में दर्ज हो जाता है।  इसकी आनलाइन निगरानी भी होती है। कई मौकों पर ड्राइवर को फोन कर बताया भी जाता है कि आप बस की स्पीड को कम करें। स्पीड गर्वनर जीपीआरएस सिस्टम पर काम करता है, इसलिए कई लोग इसे बस से निकाल देते हैं।

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इन हादसों पर रोक लगाने के लिए सरकार को जांच का दायरा बढ़ाना होगा। लापरवाही छोड़ सख्ती अपनानी होगी। ऐसे भीषण सड़क हादसों में बीते कुछ सालों में हजारों लोग मारे गए हैं। 2015 से 2017 तक के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 11,000 लोग हर साल बस हादसों में मारे जाते हैं। अकेले यूपी में ही 2017 में ऐसी 1,406 मौतें हुईं। यही नहीं 2018 में इस तरह के हादसों में 1,684 लोग मारे गए।

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