विश्व के अलग-अलग देशों से सूर्यग्रहण, पीएम मोदी भी नहीं छोड़ पाए मोह

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दशक का अंतिम सुर्यग्रहण (Solar Eclipse 26 December) गुरुवार को दुनियाभर में देखा गया। 2 घंटे 40 मिनट के दौरान ओडिशा, केरल, गुजरात, तमिलनाडु , कर्नाटक, महाराष्ट्र और दिल्ली, मध्यप्रदेश के इंदौर सहित कई हिस्सों में सूर्य ग्रहण देखा गया। इस खंडग्रास सूर्यग्रहण को देखने के लिए लोग काफी उत्साहित नज़र आए। लोगों ने सूर्यग्रहण की तस्वीर को सोशल मीडिया पर ट्वीट भी किया, लेकिन इनमें सबसे ज्यादा चर्चित रही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर। प्रधानमंत्री मोदी भी सूर्यग्रहण देखने का मोह नहीं त्याग पाए। वहीं देश और दुनिया के अलग-अलग कोनों में सूर्यग्रहण अलग-अलग समय पर अलग-अलग आकर में दिखा। उत्तर भारत में यह सूर्यग्रहण पूर्ण नहीं दिखा, जबकि दक्षिण भारत के कई हिस्सों में पूर्ण सूर्यग्रहण यानी कुंडलाकार सूर्यग्रहण नजर आया।

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सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse 26 December) को वैज्ञानिकों ने ‘रिंग ऑफ फायर’ का नाम दिया है. बता दें कि इससे पहले इस साल 6 जनवरी और 2 जुलाई को आंशिक सूर्य ग्रहण लगा था. देश के कई हिस्सों में सूर्य ग्रहण (Surya Grahan) का अद्भुत नजारा दिखना शुरू हो चुका है. आपको बता दें की यह पूर्ण सूर्य ग्रहण नहीं होगा. इस बार चंद्रमा की छाया सूर्य का पूरा भाग नहीं ढक पाएगी. इस ग्रहण में सूर्य का बाहरी हिस्सा प्रकाशित रहेगा. यह ग्रहण धनु राशि और मूल नक्षत्र में होगा. सूर्य के साथ केतु, बृहस्पति और चंद्रमा आदि ग्रह होने से ज्योतिष में इस कल्याणकारी योग का विशेष लाभ मिलेगा.

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पौराणिक मान्यता के अनुसार सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse 26 December) की कथा समुद्र मंथन से जुड़ी है। प्राचीन काल में देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था। इस मंथन में 14 रत्न निकले थे। समुद्र मंथन में जब अमृत कलश निकला तो इसके लिए देवताओं और दानवों के बीच युद्ध होने लगा। सभी इसका पान करके अमर होना चाहते थे। तब भगवान विष्णु ने मोहिनी अवतार लिया और देवताओं को अमृतपान करवाया। उस समय राहु नाम के एक असुर ने भी देवताओं का वेश धारण करके अमृत पान कर लिया था। चंद्र और सूर्य ने राहु को पहचान लिया और भगवान विष्णु को बता दिया। विष्णुजी ने क्रोधित होकर राहु का सिर धड़ से अलग कर दिया, क्योंकि राहु ने भी अमृत पी लिया था, इस कारण उसकी मृत्यु नहीं हुई। राहु का भेद चंद्र और सूर्य ने उजागर कर दिया था। इस वजह से राहु चंद्र और सूर्य से शत्रुता रखता है और समय-समय पर इन ग्रहों को ग्रसता है। शास्त्रों में इसी घटना को सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण कहते हैं।

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-mradul tripathi

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