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एनसीपी-कांग्रेस के साथ पर शिवसेना की सफाई!

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महाराष्ट्र (Maharashtra) में सरकार गठन पर फंसा पेंच नहीं सुलझता देख राज्यपाल ने राष्ट्रपति शासन (President’s Rule) लगा दिया। इसके बाद भी हंगामा और बढ़ गया। शिवसेना पहले भाजपा के साथ थी फिर एनसीपी (NCP ) और कांग्रेस (Congress ) के पास पहुंची और अब कहा जा रहा है कि पार्टी फिर से बीजेपी (BJP ) के साथ गठबंधन के लिए हामी भर सकती है (President’s Rule In Maharashtra LIVE)। अब शिवसेना ने एनसीपी और कांग्रेस का साथ देने पर अपनी सफाई दी है। शिवसेना ने सामना (Saamana) में लिखा है कि ऐसा क्यों हुआ कि वह कांग्रेस और एनसीपी के समर्थन से सरकार को भी राजी हो गई।

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शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के माध्यम से कहा है कि महाराष्ट्र की जनता द्वारा दिए आदेश का पालन नहीं हो रहा है और यह जनादेश का अपमान है (President’s Rule In Maharashtra LIVE)। आदि तत्वचिंतन का विचार देने वालों को एक बात समझ लेनी चाहिए कि जो ये जनादेश मिला है, ये ‘दोनों’ को मिला है। दोनों ने मिलकर जिस नीति पर मुहर लगाई उसे यह जनादेश मिला है। इस बात को वे मानने को तैयार नहीं थे, इसीलिए महाराष्ट्र की माटी का स्वाभिमान बनाए रखने के लिए हमें ये कदम उठाना पड़ा। इसका दोष कोई हमें क्यों दे? कहा जाता है कि भारतीय जनता पार्टी तत्ववादी, नैतिकता और संस्कारों से युक्त पार्टी है तो महाराष्ट्र के संदर्भ में भी उन्हें तत्व और संस्कार का पालन करना चाहिए था। भारतीय जनता पार्टी (BJP) विरोधी पक्ष में बैठने को तैयार है। इसका मतलब कांग्रेस और राष्ट्रवादी का साथ देने को तैयार हैं, ऐसा कहा जाए तो उन्हें मिर्ची नहीं लगनी चाहिए। दिए गए वचन पर भाजपा कायम रहती तो परिस्थिति इतनी विकट न होती।

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शिवसेना ने सामना में आगे लिखा है कि शिवसेना से जो भी तय हुआ है, वो नहीं देंगे भले हमें विरोधी पक्ष में बैठना पड़े, ये दांव-पेच नहीं बल्कि शिवसेना को नीचा दिखाने का षड्यंत्र है। किसी भी परिस्थिति में महाराष्ट्र में सत्ता स्थापना नहीं होने देना और राजभवन के पेड़ के नीचे बैठकर पत्ते पीसते बैठने के खेल को महाराष्ट्र की जनता देख रही है। कांग्रेस या राष्ट्रवादी के साथ हमें क्या करना है, ये हम देख लेंगे। सत्ता स्थापना होने की बजाय, सत्ता स्थापना न होने में ही कुछ लोगों को खुशी मिल रही है। खुशी किस बात की होनी चाहिए? दिए गए वचन को निभाने में खुशी मनाई जानी चाहिए या महाराष्ट्र को अस्थिरता की खाई में धकेलने पर खुशी मनाई जानी चाहिए, ये उन्हें ही तय करने दो।

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     – Ranjita Pathare 

 

 

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