Sabarimala Review Petitions LIVE : SC ने फैसला रखा सुरक्षित

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केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर उठा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है| शीर्ष न्यायलय द्वारा महिलाओं के प्रवेश को अनुमति देने के बाद भी भगवान अयप्पा भक्त महिलाओं को मंदिर में प्रवेश नहीं करने दे रहे हैं| अब इस मामले में पुन: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो चुकी है (Sabarimala Review Petitions LIVE)|

सबरीमाला मंदिर, दर्शन और हमला

A Supreme Court bench comprising justices Arun Mishra and Naveen Sinha said the post of CBI director

Sabarimala Review Petitions LIVE Updates In Hindi :

शीर्ष न्यायलय ने मामले में पुनर्विचार याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखा है|

बोर्ड के वकील ने कहा कि अब उसने फैसले का सम्मान करने का निर्णय किया है|

देवस्वओम बोर्ड का समर्थन

मंदिर का संचालन करने वाले त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड ने मंदिर में सभी महिलाओं के प्रवेश को अनुमति देने वाले उच्चतम न्यायालय के फैसले का समर्थन किया है|

TDB का यू-टर्न

सुनवाई के दौरान मंदिर की देखभाल करने वाली ट्रैवनकोर देवास्वोम बोर्ड  ने कोर्ट में कहा कि सभी उम्र की महिलाओं को अयप्पा के मंदिर में प्रवेश की अनुमति देनी चाहिए|

सदस्यीय पीठ का गठन 

नायर सर्विस सोसायटी की ओर से पेश वकील के. पराशरन ने पांच सदस्यीय पीठ के समक्ष दलीलें रखनी शुरू कर दी हैं।

वकील पराशरन की मांग

वकील पराशरन ने सबरीमला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने वाले फैसले को रद्द करने की मांग की है|

केरल सरकार

सबरीमाला प्रकरण पुनर्विचार याचिकाओं के माध्यम से फिर से नहीं खोला जा सकता| सबरीमला सार्वजनिक व्यवस्था का मुद्दा है, इसे संवैधानिक वैधता की परीक्षा में खरा उतरना होगा|

सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है| इस संविधान पीठ में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन, जस्टिस ए एम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड और जस्टिस इंदु मल्होत्रा इस बेंच में शामिल हैं|

देवता के चरित्र का आधार

सुप्रीम कोर्ट में नायर सर्विस सोसाइटी की तरफ से वकील के. पारासरन ने कहा कि महिलाओं के एक ग्रुप को देवता के चरित्र के आधार पर बाहर रखा गया है| ये प्रैक्टिस एक निश्चित आयु तक की सीमा के लिए तय की गई थी, लेकिन इसे छुआछूत नहीं कहा जा सकता है|

चिन्हित लोगों को दर्शन से वंचित रखना गलत नहीं 

याचिकाकर्ताओं ने सुनवाई के दौरान कहा कि एक प्रथा के हिसाब से किन्हीं चिन्हित लोगों को दर्शन से वंचित रखना गलत नहीं है. सुप्रीम कोर्ट में केरल सरकार ने सबरीमाला मुद्दे पर दायर की गई पुनर्विचार की याचिका का विरोध किया है

मनु सिंघवी की दलील

Video : सबरीमाला मंदिर में महिलाओं ने किए दर्शन

मनु सिंघवी की दलील है कि हिंदू धर्म में देवताओं की अलग-अलग रूप में पूजा होती है| सबरीमाला में उनके देवता की पूजा अलग तरीके से होती है| यहां मामला जाति से नहीं जुड़ा है बल्कि पूरी तरह पूजा करने की प्रकृति से जुड़ा है| लिहाजा आर्टिकल 17 (छुआछूत) लागू नहीं होगा|

अभिषेक मनु सिंघवी कर रहे दलील पेश

त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड के पूर्व चेयरमैन प्रयार गोपालकृष्णन की तरफ से पैरवी कर रहे अभिषेक मनु सिंघवी दलील पेश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि मेरे पास याचिका दायर करने की वजह है|

सबरीमाला मंदिर: सुप्रीम कोर्ट 54 पुनर्विचार याचिकाओं पर कर रहा है सुनवाई

सुनवाई की शुरुआत में सीजेआई ने कहा

सुनवाई की शुरुआत में सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा हमारे पास 54 पुनर्विचार याचिकाएं हैं, कुछ जनहित याचिकाएं हैं और कुछ ट्रांसफर याचिकाएं हैं|

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केरल की महिलाओं रेशमा सी वी, शांतिला, बिंदू ए और कनकदुर्गा ने आवेदन दायर करके हस्तक्षेपकर्ता के रूप में सुने जाने का अनुरोध किया। वे फैसले का समर्थन कर रही हैं|

सबरीमाला मंदिर : छह दिन में जन्मे छह सवाल..!

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महिलाओं को मिली थी प्रवेश की इजाजत 

इसके पहले 28 सितंबर को हुई सुनवाई में शीर्ष न्यायालय ने 4-1 के बहुमत से फैसला सुनाया था| कोर्ट ने कहा था कि सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश की इजाजत है| कोर्ट ने 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी को लिंग आधारित भेदभाव बताते हुए निरस्त कर दिया था|

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कोर्ट के फैसले के बाद वर्ष 2018 में कई महिलाओं ने मंदिर में प्रवेश की कोशिश की लेकिन वे सफल नहीं हो पाई|

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वहीं इस साल की शुरुआत में 2 जनवरी को दो महिलाएं भगवान् अयप्पा के दर्शन करने में सफल हुई थीं| अब उन दोनों महिलाओं को समाज के साथ ही अपने परिवार के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है|

                            – रंजीता

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