मोहन भागवत ने कहा राष्ट्रवाद शब्द का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए

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इनदिनों देशभर में राष्ट्रवाद , देशभक्त , हिन्दू , मुस्लिम जैसे मुद्दों पर सियासत गरमाई हुई है। (Mohan Bhagwat on Nationalism) सत्तापक्ष और विपक्ष की ओर से अक्सर एक दूसरे पर देशद्रोही और देशभक्त जैसे आरोप प्रत्यारोप लगते रहते है. इसी बीच राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के अध्यक्ष मोहन भागवत की ओर से बड़ा बयान सामने आया है, जी हां मोहन भागवत का कहना है कि देश में राष्ट्रवाद की जगह राष्ट्र या राष्ट्रीय जैसे शब्दों का इस्तेमाल होना चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि राष्ट्रवाद का मतलब नाजी या हिटलर भी निकाला जा सकता है.

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दरअसल मोहन भागवत झारखंड (Mohan Bhagwat On Nationalism) की राजधानी रांची में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. इसी दौरान उन्होंने ये बात कही. साथ ही उन्होंने ये भी कहा, दुनिया के सामने इस वक्त ISIS, कट्टरपंथ और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दे सबसे बड़ी चुनौती है. कार्यक्रम में मोहन भागवत ने ये भी कहा कि विकसित देश अपने व्यापार को हर देश में फैलाना चाहते हैं. इसके जरिए वो अपनी शर्तों को मनवाना चाहते हैं.

इससे पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत (Mohan Bhagwat On Nationalism) ने स्तंभकारों के एक समूह से कहा था कि खुलापन हिन्दुओं की विशेषता है और इसे बचाये रखा जाना चाहिए.भागवत ने कहा कि हिन्दू समाज को जागृत होना चाहिए, लेकिन किसी के विरूद्ध नहीं होना चाहिए. भागवत ने दिल्ली के छत्तरपुर इलाकों में देशभर के 70 स्तंभकारों से बंद कमरे में संवाद किया और आरएसएस के बारे में फैलायी जा रही गलत धारणा को लेकर चर्चा की. आरएसएस प्रमुख के साथ बैठक में मौजूद कुछ स्तंभकारों ने इस संवाद को सार्थक बताया जिसमें विविध विषयों पर बड़ी चर्चा हुई.

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एक स्तंभकार के अनुसार, मोहन भागवत (Mohan Bhagwat On Nationalism)  ने कहा,है कि  ‘खुलापन हिन्दुओं की विशेषता है और इसे बचाये रखा जाना चाहिए.’ भागवत ने हिन्दुओं को जागृत एवं सतर्क रहने पर जोर देते हुए कहा कि जब तक हिन्दू संगठित एवं सतर्क है, उसे कोई खतरा नहीं है. स्तंभकार के अनुसार सरसंघचालक ने कहा, ‘हिन्दुओं को जागृत रहना है लेकिन किसी के विरूद्ध नहीं. उन्हें प्रतिक्रियावादी होने की जरूरत नहीं. हम किसी का वर्गीकरण नहीं करते हैं. हम किसी पर संदेह नहीं करते हैं.’ नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और इसके खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर भागवत ने कहा कि किसी भी कानून को नापसंद किया जा सकता है और उसमें बदलाव की मांग की जा सकती है, लेकिन इसके नाम पर न तो बसें जलाई जा सकती हैं और न ही सार्वजनिक संपत्ति को बर्बाद किया जा सकता है.

सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत (Mohan Bhagwat On Nationalism) की अगुआई में रांची में पांच दिनों का संघ समागम चल रहा है। राजधानी के मोरहाबादी में रामदयाल मुंडा फुटबॉल स्‍टेडियम में बड़ी संख्‍या में स्‍वयंसेवक सरसंघचालक को सुनने पहुंचे। डॉ भागवत ने यहां स्‍वयंसेवकों के शारीरिक प्रदर्शन और कौशल का निरीक्षण किया। अपने पांच दिवसीय दौरे पर बुधवार शाम रांची पहुंचे संघ प्रमुख यहां देश-दुनिया के ज्‍वलंत मसलों पर अलग-अलग सत्रों में गंभीर मंथन करेंगे।

गुरुवार (Mohan Bhagwat On Nationalism) की सुबह संघ प्रमुख रांची महानगर के स्वयंसेवकों एवं शहर के गण्यमान्य लोगों को संबोधित करने के लिए थोड़ी देर में पहुंचेंगे। उसके बाद झारखंड और बिहार के तीनों प्रांतों के अधिकारियों के साथ अलग-अलग विषयों पर चर्चा करेंगे। इसमें पर्यावरण संरक्षण, ग्राम विकास, गो संवर्धन, सामाजिक समरसता तथा संयुक्‍त परिवार प्रबोधन विषय मुख्य हैं। वैसे देश एवं राज्य की वर्तमान स्थिति पर भी इस बैठक में चर्चा होगी। 23 फरवरी की शाम वह रांची से देवघर के लिए रवाना हो जाएंगे।

संघ प्रमुख (RSS Chief Mohan Bhagwat) रांची में रहकर अलग-अलग विषयों पर संघ प्रमुख संघ के अधिकारियों के साथ चर्चा करेंगे। इसमें पर्यावरण संरक्षण का विषय सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि प्रकृति के साथ खिलवाड़ करने का नतीजा चीन में कोरोना वायरस के रूप में दिख रहा है। संघ पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने पर सालोभर काम करता है। बैठक में इस कार्य में और तेजी लाने पर चर्चा होगी। बैठक में संयुक्‍त परिवार और सामाजिक समरसता विषय पर भी चर्चा होगी।

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-मृदुल त्रिपाठी

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