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Operation Thirst : रेलवे स्‍टेशनों पर पानी के नाम पर बेचा जा रहा ज़हर

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रेल में सफर के दौरान हम अक्सर स्टेशन पर बिकने वाली पानी की बोतल खरीद लेते हैं। इससे हमारी प्यार भी बुझ जाती है, लेकिन यही पानी हमारे लिए ज़हर बनता जा रहा है। एक ऐसा धीमा ज़हर, जिसे अनजाने में लाखों लोग रोज़ पी रहे हैं। रेलवे स्टेशन पर बिक रहे पानी की जब जांच की गई तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। इसके बाद 800 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी हुई। पानी की मांग लगातार बढ़ रही है और इसका फायदा अवैध पानी का कारोबार करने वाले उठा रहे हैं। लोगों की जान से हो रही खिलवाड़ पर रोक लगाने के लिए आरपीएफ के डीजी अरुण कुमार ने देश के सभी स्टेशनों पर अभियान चलाया, जिसे ‘ऑपरेशन थर्स्ट’ (Operation Thirst) नाम दिया गया।

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धड़ल्ले से बिकती मौत

रेलवे स्टेशनों पर पानी का अवैध कारोबार धड़ल्ले से चल रहा था। ‘ऑपरेशन थर्स्ट’ (Operation Thirst) को शुरू करने के बाद अवैध पानी बेचने के आरोप में लोगों की गिरफ्तारी के साथ, पानी की बोतलें भी बरामद की, लेकिन बड़ी बात यह सामने आई कि मौत के इस व्यापार में कई कई नामचीन व्यक्ति भी शामिल थे। इस कार्रवाई के बारे में रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स के सीनियर ऑफिसर का कहना है कि हमें लगातार शिकायत मिल रही थी कि रेलवे स्टेशनों पर खराब गुणवत्ता का पानी बेचा जा रहा है।

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शिकायतें मिलने के बाद आरपीएफ डीजी ने ‘ऑपरेशन थर्स्ट’ अभियान चलाया, जिसके लिए स्पेशल टीम बनाकर तमाम स्टेशनों के हॉकर्स और स्टॉल पर जाकर रेड की। रेड के दौरान तमाम स्टेशन पर अवैध पानी मिला, जिसको स्टेशन पर बेचने की परमिशन नहीं थी और वो पानी की बोतलें भी थी, जिन्हें यूजलेस बोतल में पानी भरकर बेचा जा रहा था। कार्रवाई के दौरान 801 लोगों को अवैध पानी बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया और रेलवे एक्ट 144 और 153 के तहत 732 केस दर्ज किए गए और गिरफ्तार किए गए लोगों के पास से 48,860 पानी की अवैध बोतल बरामद की गई है। वहीँ इस मामले में चार पेंट्री मैनेजर को भी गिरफ्तार किया गया है।

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