निवृत्त जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी सत्यमित्रानंदगिरि का देहावसान

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पद्मभूषण से सम्मानित निवृत्त जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी सत्यमित्रानंदगिरि महाराज (Shankaracharya Mahamandaleshwar Swami Satyamitranand Giri) 25 जून 2019 को ब्रह्मलीन हो गए| वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे और देहरादून के एक अस्‍पताल में उनका उपचार चल रहा था। स्वामी अवधेशानन्द गिरि इनके शिष्य हैं| स्वामी सत्यमित्रानंदगिरि महाराज (Swami Satyamitranand Giri dead) हरिद्वार में भारत माता मंदिर के संस्थापक भी थे। भारत माता जनहित ट्रस्ट के “राघव कुटीर” के आंगन में उन्हें बुधवार शाम चार बजे समाधि दी जाएगी।

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स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि का जन्म 19 सितंबर 1932 में उत्तर प्रदेश के आगरा में हुआ था। उनका परिवार मूलत: सीतापुर (उत्तर प्रदेश) का निवासी था। संन्यास से पहले वे अंबिका प्रसाद पांडेय के नाम से जाने जाते थे। स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि (Shankaracharya Mahamandaleshwar Swami Satyamitranand Giri dead) महाराज के निधन का समाचार मिलते ही संत समाज सहित हिंदू समाज में शोक की लहर छा गई। सतातन संस्कृति के पुरोधा और विश्व में वैदिक संस्कृति का प्रचार करने में जगद्गुरू शंकराचार्य अग्रणी रहते थे।

वे अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के मुद्दे को लेकर भी काफी मुखर रहे हैं। नवंबर 2018 में भी उन्होंने कहा था- “अगर राम मंदिर अयोध्या (Swami Satyamitranand Giri dead) में नहीं बनेगा, तो क्या मक्का, वेटिकन सिटी या किसी अन्य तीर्थ में बनेगा? उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर के अनेक प्रमाण मिल चुके हैं।“

महामंडलेश्वर स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी ( Shankaracharya Mahamandaleshwar Swami Satyamitranand Giri) का बचपन का अधिकांश समय संत-महात्माओं या फिर विभिन्न विषयों के विद्वानों के सान्निध्य में ही बीतता था। उन्होंने बेहद कम आयु में ही महामंडलेश्वर स्वामी वेदव्यासानंद महाराज से संन्यास दीक्षा ग्रहण कर गृहत्याग कर ‘सत्यमित्र ब्रह्मचारी’ के रूप में धर्म साधना को अपना कर्म क्षेत्र बना लिया।

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29 अप्रैल 1960 अक्षय तृतीया के दिन मात्र 26 वर्ष की आयु में ज्योतिर्मठ भानपुरा पीठ पर जगद्गुरु शंकराचार्य पद पर उन्हें प्रतिष्ठित किया गया। उन्होंने प्रख्यात चिकित्सक स्व. डॉ.आरएम सोजतिया के सहयोग से भानपुरा और उसके आसपास क्षेत्र के अतिनिर्धन लोगों के उत्थान की दिशा में अनेक वर्ष तक कार्य किया।

उन्होंने सद्भाव, सांप्रदायिक सौहार्द और समन्वय भाव (Swami Satyamitranand Giri dead) के प्रसार के लिए विश्व के 65 से अधिक देशों की यात्रा की थी। धर्म, संस्कृति, समाज और विश्व कल्याण की उनकी इन्हीं सेवाओं को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल पद्मभूषण से अलंकृत किया गया था।

दिया और देश की रक्षा को अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

पतित पावनी गंगातट सप्तसरोवर पर वर्ष 1983 में अपने आप में अनोखे 108 फीट ऊंचे आठ मंजिला भारत माता मंदिर की स्थापना कर पद्मभूषण निवृत्त शंकराचार्य महामंडलेश्वर स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी (Swami Satyamitranand Giri dead) पूरे विश्व में चर्चा का केंद्र बन गए। आठ मंजिला इमारत के रूप में यह एक ऐसा मंदिर है, जिसे भारत देश के निर्माण और रक्षा में सर्वस्व त्याग कर आहुति देने वाले भारतमाता के सपूतों को समर्पित किया गया है, जहां रोजाना उनकी आराधना की जाती है। आमतौर पर जितने भी मंदिर हैं, वह किसी न किसी देवी-देवताओ को समर्पित हैं पर, भारत माता मंदिर उन संत-महात्माओं, वीरांगनाओं और शूर-वीरों को समर्पित है, जिन्होंने देश के सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक जीवन में अमूल्य योगदान दिया है|

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इसके अलावा उन्होंने देश-विदेश में अनेक जगह मानव सेवा और वंचितों के सेवार्थ कई कार्यक्रम चलाए, उनमें कई अब भी चल रहे हैं।

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