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अगर नहीं लिए सिक्के तो फिर….

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मोदी सरकार द्वारा की गई नोटबंदी को लगभग 2 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन बाज़ारों में अभी तक सिक्के लेने से लोग कतरा रहे हैं। कई राज्यों में लोग 10 रुपए के सिक्के लेने से कन्नी काट रहे हैं तो कई लोग छोटे 1 रुपए के सिक्के लेने से परहेज कर रहे हैं। हालांकि सरकार का कहना है कि सिक्के पर किसी भी तरह की कोई पाबन्दी नहीं है और वे चलन में हैं। इस कड़ी में देश की राजधानी दिल्ली से महज़ 100 किमी. दूर रेवाड़ी में लोग 10 रुपए के सिक्के लेने से इंकार कर रहे हैं।

रेवाड़ी से जब एक युवक राजधानी दिल्ली पहुंचा तो उसे डीटीसी की बस में कंडक्टर ने 10 रुपए का सिक्का दिया। दस रुपए का सिक्के दिए जाने पर युवक ने उसे लेने से साफ़ इंकार कर दिया। युवक ने बताया कि रेवाड़ी में यह सिक्का नहीं चलता इसी वजह से वह यह सिक्का नहीं लेगा। कंडक्टर के लाख समझाने के बावजूद युवक सिक्का लेने को तैयार नहीं हुआ, तब मजबूरन कंडेक्टर को उसे डरना पड़ा। या यूं कहें कि कंडक्टर ने उसे सच्चाई से अवगत कराया। कंडक्टर ने बताया की यह सिक्का भारत सकरार की तरफ से पूरी तरह वैध है और यदि कोई भी व्यक्ति इसे लेने से मन करता है तो उसके खिलाफ पुलिस में शिकायत की जा सकती है। इसके तहत सिक्का लेने से मना करने व्यक्ति को 7 साल की जेल भी हो सकती है।

हालांकि यह आलम तो कई राज्यों में है और राजधानी दिल्ली भी इससे अछूती नहीं है। राजधानी दिल्ली में खुद ही सिक्के सरलता से कोई स्वीकार नहीं करता। दिल्ली से सटे गाजियाबाद में भी लोगों की यही समस्या है कि, दस रुपए का सिक्का हो या फिर एक रुपए का छोटा सिक्का, सभी के लिए लोगों को अपना सर फोड़ना पड़ता है तब कहीं जाकर इन सिक्कों को लोग स्वीकारते हैं। वहां के फल वाले तो यह तक कहते हैं कि दाम में एक रुपया कम दे दो, लेकिन यह सिक्का मत दो। यह आलम सिर्फ गांव में नहीं बल्कि बड़े-बड़े शहरों में भी है। पढ़े-लिखे व समझदार होने के बाद भी लोग इस तरह की भ्रांतियों में विश्वास करते हैं।

यह पूरा सिलसिला नोटबंदी के बाद शुरू हुआ जब बाजार में बड़े पैमाने पर सिक्के उतारे गए थे। इन्हीं सिक्कों को जब बैंकों में जाकर लोग जमा कराने लगे तो बैंक कर्मचारी इसमें आनाकानी करने लगे। बैंक कर्मचारी इन सिक्कों को गिनने से परहेज करने लगे थे। उनका कहना था कि अगर नोट कितने भी हो उन्हें मशीन की सहायता से आसानी से गिना जा सकता है, लेकिन सिक्कों को गिनने में कठिनाई होती है। लेकिन रिजर्व बैंक के प्रवक्ता ने कहा कि यह सिक्के नियमो के तहत ही जारी किए गए हैं और पूरी तरह से वैध हैं। अगर कोई भी व्यक्ति या बैंक इसे लेने से इंकार करे तो इसकी शिकायत पुलिस में की जा सकती है। सिक्के लेने से इंकार करना अपराध की श्रेणी में आता है और इसके तहत 7 साल की सजा भी हो सकती है।

(प्रभात)

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