Rajiv Gandhi Birth Anniversary : राजीव गांधी जो कभी प्रधानमंत्री नहीं बनना चाहते थे

0

आज देश के पूर्व प्रधानमंत्री और देश को सूचना क्रांति से परिचित करवाने वाले नेता राजीव गांधी की जन्म तिथी है (Rajiv Gandhi Birth Anniversary)। यूं तो राजीव गांधी को देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री के तौर पर जाना जाता है, लेकिन राजीव गांधी का राजनीति में आने का कोई लक्ष्य नहीं था। राजनीति में उनकी एंट्री अकस्मात ही थी। वे आए तो एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर बनकर थे, लेकिन गए तो सबसे लोकप्रिय नेता के रुप में।

Rajiv Gandhi 75th Birth Anniversary Whatsapp Status : राजीव गांधी के जीवन से जुड़ी खास बातें

राजीव गांधी का जन्म मुंबई में 20 अगस्त 1944 को हुआ था। 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद वे प्रधानमंत्री (1984-1989) बने थे। देहरादून के प्रतिष्ठित दून स्कूल से पढ़े राजीव ने कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग का कोर्स किया (Rajiv Gandhi Birth Anniversary)।

भारत लौटने के बाद उन्होंने कमर्शियल पायलट का लाइसेंस हासिल किया और इंडियन एयरलाइंस में बतौर पायलट काम करने लगे।

राजीव गांधी को भारत में इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और कम्युनिकेशन क्रांति का श्रेय दिया जाता है। देश को सबसे पहले मोबाईल और कम्प्यूटर से राजीव गांधी ने ही परिचित करवाया था। उन्होंने इकनॉमी के उदारीकरण और सरकारी नौकरशाही में सुधार लाने के लिए कई कदम उठाए।

राजनीति में कैसे आ गए-

राजीव गांधी की जिंदगी यू ंतो मज़े में चल रही थी। एयरफोर्स में प्लेन उड़ा रहे थे। लेकिन उनके भाई और कांग्रेस के वारिस के तौर पर देखे जाने वाले नेता संजय गांधी के निधन ने उनकी ज़िंदगी की धारा को ही बदल दिया। 23 जून 1980 को जब संजय गांधी का प्लेन क्रैश हुआ तो उसके बाद राजीव गांधी की जिंदगी बदली और वे राजनीति में उतरे। जून 1981 में अमेठी लोकसभा उपचुनाव में उन्हें जीत हासिल हुई। उन्हें 258,884 वोट मिले। इस सीट पर संजय गांधी की मृत्यु के बाद उपचुनाव हुए थे। इसी महीने वे युवा कांग्रेस की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के मेंबर भी बन गए।

Chandrayaan 2 Live Update : चांद की कक्षा में सफलतापूर्वक स्‍थापित हुआ Chandrayaan 2 

दूसरा हादसा…

31 अक्टूबर 1984। भारतीय राजनीति का सबसे काला दिन। ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद इंदिरा गांधी के दो सिख बॉडीगार्ड्स ने उनकी हत्या कर दी। जब यह हादसा हुआ, जब राजीव गांधी कोलकाता में थे। उनकी मां की हत्या के कुछ ही घंटों बाद सरदार बूटा सिह और तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने उनसे प्रधानमंत्री बनने का आग्रह किया। पद संभालने के बाद उन्होंने राष्ट्रपति से संसद भंग कर दोबारा चुनाव कराने को कहा। राजीव गांधी कांग्रेस अध्यक्ष बने और चुनावों में कांग्रेस ने ऐतिहासिक जीत हासिल की। तब कांग्रेस को 414 सीटें मिली थीं। 40 साल की उम्र में 31 दिसंबर 1984 को राजीव गांधी भारत के सबसे युवा पीएम बने। और इस तरह राजनीति में दुर्घटनावश आए राजीव राजनीति के सर्वोच्च शिखर तक पहुंचे।

हम सभी जानते हैं कि प्रधानमंत्री रहते हुए श्रीलंका में शांति सेना भेजे जाने को लेकर आतंकी संगठन ‘लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम‘ (लिट्टे) राजीव गांधी का दुश्मन बन गया। और इसी संगठन द्वारा तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक चुनावी रैली के दौरान 21 मई 1991 को उन्हें बम से उड़ा दिया गया। आत्मघाती हमलावर को खुद उन्होंने अपने पास आने की इजाजत दी थी।

इमरान ने किया मोदी से कश्मीर का सौदा

Share.