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कांग्रेसियों का मन चूहे का और पैर चींटी के

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राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) के कांग्रेस अध्यक्ष के पद से इस्तीफा देने के बाद से ही हंगामा मचा हुआ है। कई लोग जहां उन्हें इस्तीफा वापस लेने के लिए मना रहे हैं वहीँ कई ऐसे भी जो उनके फैसले का साथ दे रहे हैं। अब इस मामले पर शिवसेना (Shiv Sena) ने अपने मुखपत्र सामना (Saamana)  में भी एक आर्टिकल लिखा है, जिसमें कहा गया है कि कांग्रेसियों का मन चूहे का है और पैर चींटी के हैं। राहुल गांधी ने एक साहसिक कदम उठाया। इसका सम्मान करने की बजाय कांग्रेसी उनके पैरों में गिरकर गिड़गिड़ा रहे हैं।

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शिवसेना ने सामना में आगे लिखा, “मोदी या राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के खिलाफ जोरदार लड़ाई तो छोड़िए, थोड़ा-बहुत लड़ने का प्रयास कांग्रेस पार्टी की ओर से होता नहीं दिखा। इसका एक कारण कांग्रेसियों की पंगु मानसिकता है, इसलिए लोगों ने कांग्रेस को पैरों तले रौंदा। कांग्रेस वाले गांधी परिवार की कृपा से अय्याश हो ही गए थे, लेकिन वे मुफ्तखोर भी हैं। देश की राजनीतिक परिस्थिति का उन्हें ख्याल नहीं है। कर्नाटक में भाजपा ने उनकी पार्टी को खोखला कर दिया है। वहां की जेडीएस-कांग्रेस आघाड़ी सरकार गिरने के कगार पर है, लेकिन उस पार्टी का एक भी वफादार अपनी पार्टी की प्रतिष्ठा को संवारने के लिए दौड़-भाग करता नहीं दिखता। सभी लोग छाती पीटते हुए राहुल गांधी के दरवाजे पर खड़े हैं।”

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विधानसभा चुनाव के बारे में सामना में लिखा गया है, “चार राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं,  उसमें पार्टी की क्या भूमिका होगी? चुनाव कैसे से लड़ा जाएगा? क्या करना होगा? इस पर कोई चर्चा नहीं, लेकिन ‘राहुल गांधी, इस्तीफा वापस लो! इसके लिए हाय-तौबा मची है। राहुल गांधी ने इस्तीफा देकर कांग्रेस वालों का असली चेहरा सामने ला दिया है। कांग्रेस की गिरती साख के लिए नेहरू-गांधी परिवार जिम्मेदार नहीं बल्कि जिन्होंने सालों-साल कांग्रेस का नमक खाया है, ऐसे लोग जिम्मेदार हैं। जिस कांग्रेस को एक महीने के बाद भी अध्यक्ष चुनना नहीं आता, उस कांग्रेस का अब कार्यालय पर ताला लगाकर हमेशा के लिए घर बैठ जाना ही ठीक है। कांग्रेस संगठन बिखर चुका है। कांग्रेस कार्यालय की इमारतें खड़ी हैं, लेकिन उसमें न जान बची है और न ही हलचल। नए कार्यकर्ता हैं नहीं और जो हैं वे किसी काम के नहीं, चार राज्यों की सरकार भी निश्चेत सदृश है। प्रमुख विरोधी पार्टी की भूमिका अदा करने के लिए उन्हें कब्र पर पड़ी धूल झाड़ने की भी नहीं सूझती।

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