जगन्नाथ यात्रा : मौसी के घर चले पुरी के महाराज

0

भगवान जगन्नाथ की वार्षिक रथयात्रा की शुरुआत हो चुकी है | ओडिशा के पुरी और गुजरात के अहमदाबाद में भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा निकाली जा रही है| यात्रा से पहले भाजपा अध्यक्ष अमित शाह अहमदाबाद में मंगला आरती में पहुंचे| अहमदाबाद में मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने सोने की झाड़ू लगाकर सुबह सात बजे रथयात्रा को रवाना किया|

यूनेस्‍को द्वारा पुरी के एक हिस्से को वैश्विक धरोहर की सूची में शामिल किया गया था, उसके बाद यह पहली रथयात्रा है| यह यात्रा आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को जगन्नाथपुरी से शुरू होती है| आज पुरी में भगवान के दर्शन के लिए जनसैलाब उमड़ रहा है|

मौसी के घर जा रहे भगवान

पुरी के महाराज भगवान जगन्नाथ अपने भाई भगवान बालभद्र और बहन देवी सुभद्रा के साथ जगन्नाथ मंदिर से रथ पर सवार होकर अपनी मौसी के घर गुंडिचा मंदिर जा रहे हैं| यात्रा के सामने पहले सोने के हत्‍थे वाली झाड़ू लगाकर रथ चलाया गया| पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप के बीच तीन विशाल रथों को सैकड़ों लोग मिलकर खींच रहे हैं| पहला रथ बलभद्र का, फिर सुभद्रा का और अंतिम रथ पर भगवान जगन्नाथ सवार हैं|

मोक्ष की प्राप्ति

कहा जाता है कि जो भी व्यक्ति रथ खींचता है, उसके सभी दुःख-दर्द दूर हो जाते हैं, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है| पहले तीनों रथों को नगर में घुमाया जाता है, इसके बाद तीनों गुंडिचा मंदिर जाएंगे| कल भगवान रथ से उतरकर मंदिर में प्रवेश करेंगे और सात दिन तक वहीं रहेंगे| अपनी मौसी के घर में भगवान एक हफ्ते तक ठहरते हैं, जहां उनका खूब आदर-सत्‍कार होता है| उन्‍हें कई प्रकार के स्‍वादिष्‍ट पकवानों और फल-फूलों का भोग लगाया जाता है|

ऐसा माना जाता है कि मौसी के घर अच्छे-अच्छे पकवान खाकर भगवान बीमार हो जाते हैं| इसके बाद उन्हें पथ्‍य का भोग लगाया जाता है, जिससे वे स्वस्थ हो जाते हैं| नारियल, लाई, गजामूंग और मालपुए का प्रसाद मिलता है| फिर दिन पूरे होने के बाद भगवान जगन्नाथ अपने घर यानी जगन्नाथ मंदिर वापस चले जाते हैं|  रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ को दशावतारों के रूप में पूजा जाता है, जिनमें विष्णु, कृष्ण, वामन और बुद्ध भी शामिल हैं|

रथयात्रा उत्सव प्रारंभ होने पर गणमान्यों ने दी शुभकामनाएं :

Share.