India’s First National War Memorial : पहले राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की 10 ख़ास बातें

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पुलवामा में हुए आतंकी हमले (Pulwama Terror Attack) के कारण देशभर के लोगों में पाकिस्तान के खिलाफ आक्रोश और सेना के जवानों के लिए गर्व है| वहीं हमारे शहीद हुए जवानों की याद में देश का पहला राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का निर्माण किया गया है| इसका निर्माण इंडिया गेट के सी-हेक्सगन के 40 एकड़ के क्षेत्र में किया गया है| अब शहीदों की याद में किए जाने वाले कार्यक्रमों का आयोजन इंडिया गेट के बजाय राष्ट्रीय युद्ध स्मारक ( India’s First National War Memorial ) पर किया जाएगा|

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दिल्ली में इंडिया गेट के पास प्रिंसेस पार्क में बने इस स्मारक ( India’s First National War Memorial ) के लिए सेना ने करीब 57 सालों तक संघर्ष किया, जिसके बाद इसे बनाने की मंजूरी मिली| जो भी पार्टी सत्ता में आती थी, सेना उससे इसे लेकर बात करती थी, लेकिन मोदी सरकार के कार्यकाल में इसका निर्माण पूरा किया गया| इसे बनाने में करीब 176 करोड़ रुपए की लागत आई है| आइये जानते हैं क्या है ख़ास, जिसकी वजह से स्मारक का निर्माण किया गया|

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक, नरेंद्र मोदी, मोदी सरकार, भारतीय सेना, शहीद

# यह स्मारक (National War Memorial) 1947 के बाद लड़े गए 5 युद्ध, काउंटर टेररिज्म ऑपरेशन, उग्रवाद के खिलाफ जारी अभियानों में शहीद हुए जवानों की याद में बनाया गया है|

India’s First National War Memorial Facts :

# इसमें अमर जवान ज्योति का भव्य प्रतिरूप, 26 हजार से अधिक शहीदों का नाम-रैंक ग्रेनाइट की अलग-अलग शिलाओं पर लिखा है|

# 21 परमवीर चक्र विजेताओं की कांस्य की मूर्तियां लगाई गई हैं|

# 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के निर्माण के लिए दी मंजूरी|

# साढ़े चार वर्षों में बनकर पूरी तरह से तैयार राष्ट्रीय युद्ध स्मारक|

# करीब छह दशक से अधिक समय से रुका हुआ था राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का निर्माण|

# इसके खुलने का समय गर्मियों में सुबह नौ बजे से शाम को साढ़े सात बजे तक, सर्दियों में सुबह नौ बजे खुलेगा और शाम को साढ़े छह बजे बंद किया जाएगा|

# कौन हैं ये 25942 जवान, जिनकी याद में बनाया गया युद्ध स्मारक

1,104 जवान –  जम्मू-कश्मीर ऑपरेशन्स (1947-48)

3,250 जवान – चीन से युद्ध (1962)

3,264 जवान – पाकिस्तान से युद्ध (1965)

3,843 जवान – बांग्लादेश लिबरेशन वॉर (1971)

1,157 जवान – IPKF श्रीलंका में ऑपरेशन पवन (1987)

522 जवान – कारगिल युद्ध (1999)

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950 जवान –  1984 के ऑपरेशन मेघदूत और सियाचिन में अब तक शहीद जवान

4,800 जवान – आतंकवाद से लड़ने के लिए किए गए ऑपरेशन, जैसे ऑपरेशन रक्षक में शामिल थे|

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 – रंजीता

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