Priyanka Reddy Murder Case : आखिर कब तक ?

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आजकल अखबार पढ़ने का मन नहीं करता है। जैसे ही पेपर खोलो उसमें  बलात्कार की रोज कई खबरे होती हैं। खबरों को देखकर जितना दिल कचोटता है उससे भी ज्यादा गुस्सा इस बात पर आता है कि अब एक देश में एक बार भी ऐसी मिसाल पेश क्यों नहीं की गई कि कोई भी दुष्कर्म करने का सोचे उससे  पहले ही उसकी रूह काँप जाये। देश में दुष्कर्म के लाखों मामले सामने आ चुके हैं (Priyanka Reddy Murder)। कई आरोपी भी पकड़ा गए, उन्हें सज़ा भी मुक़र्रर हो गई, लेकिन वे अभी भी जेल में सरकार की सुविधा के मजे ले रहे हैं और आराम से रह रहे हैं। आज तक कितनों को फांसी पर लटकाया गया है ?

क्या कहते हैं NCRB के आंकड़े ?

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (National Crime Records Bureau ) के आंकड़े कहते हैं  कि अधिकतर मामलों में अपने ही होते हैं दोषी। आंकड़ों के अनुसार साल 2017 में भारत में 32,559 बलात्कार के मामले रिपोर्ट हुए और 93.1% मामलों में आरोपी, पीड़ित को जानने वालों में से थे। 2015 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 3,29,243 मामले दर्ज किए गए थे और 2016 में 3,38,954 मामले दर्ज किए गए थे (Priyanka Reddy Murder)। बलात्कार के मामलों की अधिकतम संख्या मध्य प्रदेश (5,562 ) में दर्ज की गई, जिनमें से 97.5 प्रतिशत अपराध जानने वाले लोगों द्वारा किया गया था। राजस्थान 3,305 मामलों के साथ नंबर दो पर है जहां 87.9 प्रतिशत मामलों में बलात्कार जानने वालों ने ही किये।

तू न आना इस देश मेरी लाडो

हैदराबाद में  पशु चिकित्सक प्रियंका रेड्डी की हत्या के बाद विरोध में पूरा देश एक जुट हो रहा है। लोग दोषियों को तुरंत फांसी देने की मांग कर रहे हैं। वहीं दिल्ली के निर्भया केस में पीड़ित छात्र की मां अब तक आरोपियों की फांसी की सजा के लिए कोर्ट के चक्कर काट रही है, लेकिन हमारे देश में न्याय की कोई भी पुख्ता व्यवस्था नहीं  है। क्या केवल सज़ा सुना देने से न्याय मिल जाता है? जब हम  हर मामले में दूसरे देशों से अपने देश कि तुलना करते हैं  तो इस मामले में क्यों नहीं? दुनिया के दूसरे देशों की बात करें तो कुछ देश ऐसे हैं जहां बलात्‍कार के दोषियों को 24 घंटों के अंदर-अंदर सजा-ए-मौत दे दी जाती है, लेकिन हमारे देश में  तो  24 घंटों के अंदर आरोपी मिल जाये वही बहुत बड़ी बात हो जाती है। अब क्या भारत माता के आगोश में लड़कियां सुरक्षित नहीं है।

बेखौफ आरोपी

कैसे रुकेंगे ये अपराध ? आज शायद हर माँ, बेटी, बाप, भाई के के साथ ही कई लोगों के मन में ये सवाल होंगे। क्यों बढ़ रहे हैं अपराध ? इसका कारण सभी जानते हैं सिवाय सरकार के। इसका मुख्य कारण है बेखौफ घूम रहे आरोपी। हमारे देश की न्याय व्यवस्था, जिसमें आरोपियों को कड़ी सजा देने के बजाय जेल में डालकर उन्हें पेट भर खाना खिलाया जाता है। जेल में डाल देना सजा नहीं होती, क्योंकि जो लोग दुष्कर्म के मामले के आरोपी होते हैं, उनमें से अधिकतर लोग दो वक्त की रोटी के लिए जूझते रहते हैं और जब उन्हें जेल में फ्री में खाना मिलता है, वो भी बिना किसी मेहनत का तो उनके लिए इससे अच्छा और क्या हो सकता सकता है।

क्या होनी चाहिए सज़ा

ताउम्र कारावास, फांसी जैसी सज़ा इस कुकृत्य करने वाले वहशियों के लिए बहुत कम है। प्रियंका रेड्डी के मामले के बाद ऐसे तीन मामले और सामने आ चुके हैं,  जिनमें  दुष्कर्म के बाद पीड़िता को बेरहमी से मार दिया गया। तो हत्यारों को भी उतनी ही बेरहमी और दर्द भरी मौत देना चाहिए। उनके लिए सबसे  कम सज़ा तो बीच चौराहे पर लटका के मारने की होगी, लेकिन इसके साथ ही भीड़ ने ऐसे लोगों पर तब तक पत्थर फेंकना चाहिए, जब तक कि ये दरिंदे मर न जाए (Priyanka Reddy Murder)। सऊदी अरब में इस्लामिक कानून शरिया के मुताबिक ऐसे अपराध के लिए फांसी पर टांगने, सिर कलम करने के साथ-साथ आरोपी के यौनांगों को काट दिया जाता है। इराक में बलात्कार करने वालों को तब तक पत्थर मारे जाते हैं, जब तक की वो मर ना जाए। उत्तर कोरिया में बलात्कारी को सरेआम सिर में कई गोलियां दागी जाती हैं। हमारे देश में भी इन  सजाओं में से किसी एक पर मोहर लगकार लोगों के मन में खौफ पैदा करना होगा तभी  ये मामले रुक  सकते हैं ।

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     – Ranjita Pathare 

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