इन्हें दो बार करना पड़ा अविश्वास प्रस्ताव का सामना

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लोकसभा में आज यानी 20 जुलाई को मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष पहला अविश्‍वास प्रस्‍ताव पेश करने जा रहा है| सरकार के खिलाफ इस प्रकार का अविश्‍वास प्रस्‍ताव लगभग 15 साल बाद पेश किया जा रहा है| इसके पहले वर्ष 2003 में एनडीए की पूर्ववर्ती सरकार को भी अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ा था| अब तक 26 बार अविश्‍वास प्रस्‍ताव पेश किया जा चुका है|संसद में अविश्वास प्रस्ताव का इतिहास हम आपको बताते हैं| 

वाजपेयी सरकार के खिलाफ दो बार अविश्वास प्रस्ताव 

अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के खिलाफ भी अविश्वास प्रस्ताव पेश किया जा चुका है| दरअसल, तत्कालीन कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी ने वाजपेयी सरकार के खिलाफ प्रस्ताव लाया था, लेकिन उस समय विपक्ष को मुंह की खानी पड़ी| इसके बाद वर्ष 1998 में भी वाजपेयी सरकार को अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ा था, उस समय महज एक वोट से वाजपेयी सरकार गिर गई|

अविश्वास प्रस्ताव का इतिहास

हमारे देश में पहली दो लोकसभा में कोई इस तरह का प्रस्‍ताव नहीं आया| 1963 में पहला अविश्वास प्रस्ताव आचार्य जेबी कृपलानी ने जवाहरलाल नेहरू सरकार के खिलाफ लाया था, लेकिन उस समय सरकार की कार्यप्रणाली पर कोई असर नहीं हुआ था|

सबसे अधिक अविश्वास प्रस्ताव

आज तक सबसे ज्यादा इंदिरा गांधी की सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास किए गए| इंदिरा गांधी की सरकार के खिलाफ 15 से भी अधिक बार प्रस्ताव लाए गए| इसके बाद लालबहादुर शास्‍त्री और नरसिंहराव सरकारों को तीन-तीन अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ा|  1993 में नरसिंहराव ने बहुत ही मामूली अंतर से अपनी सरकार बचाई थीं|

क्या होता है अविश्‍वास प्रस्‍ताव ?

संविधान के अनुच्‍छेद 75(3) के अनुसार यह एक संसदीय प्रस्ताव है, जिसे पारंपरिक रूप से विपक्ष द्वारा संसद में सत्ता में बैठी सरकार को हराने या कमजोर करने की उम्मीद से पेश किया जाता है| कोई भी लोकसभा सदस्‍य यदि 50 सांसदों का समर्थन प्राप्‍त कर लेता है तो सरकार के खिलाफ अविश्‍वास प्रस्‍ताव पेश किया जा सकता है| प्रस्ताव स्वीकार करने के 10 दिन के अंदर इस पर चर्चा होनी आवश्यक होती है| चर्चा होने के बाद उस पर वोटिंग होती है, उस दौरान यदि सरकार बहुमत साबित करने में विफल रहती है तो सरकार गिर जाती है|

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