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Supreme Court Under RTI Act : RTI के दायरे में आएगा सीजेआई का दफ्तर

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देश के प्रधान न्यायाधीश (Chief Justice of India) का दफ्तर भी अब सूचना के अधिकार (RTI) कानून के दायरे में आने वाला है। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) में ही दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court ) के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर बुधवार को 3-2 से फैसला सुनाया गया। सुप्रीम कोर्ट ( Supreme Court Under RTI Act) ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि ‘ट्रांसपेरेंसी ज्यूडिशियल इंडिपेंडेंसी’ को कम नहीं माना जा सकता है। शीर्ष अदालत ने संविधान के आर्टिकल 124 के अंतर्गत यह फैसला लिया गया है। इस फैसले के बाद अब कोलेजियम के फैसलों को सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर डाला जाएगा ताकि इसके बारे में सभी को जानकारी मिल सके।

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सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court Under RTI Act) के सेक्रेटरी जनरल और शीर्ष अदालत के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी द्वारा दिल्ली उच्च न्यायालय में साल 2009 के आदेश के खिलाफ दायर की गई थी। याचिका में कहा गया है कि सीजेआई का पद सूचना का अधिकार कानून के दायरे में आता है। फैसला सुनाते समय जस्टिस रम्मना ने कहा कि RTI का इस्तेमाल जासूसी के साधन के रूप में नहीं किया जा सकता है। पीठ में सीजेआई समेत जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना शामिल थे। नवंबर 2007 में आरटीआई कार्यकर्ता सुभाष चंद्र अग्रवाल ने आरटीआई याचिका दाखिल कि थी।

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क्या था दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला ?

दिल्ली हाईकोर्ट ने न्यायाधीश (Chief Justice of India) के दफ्तर को आरटीआई के दायरे में रखने के लिए कहा था कि सीजेआई का दफ्तर एक सार्वजनिक प्राधिकरण है और इसे सूचना के अधिकार कानून के अंतर्गत लाया जाना चाहिए। पीठ ने इस साल अप्रैल में इस याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। वहीं आज हुए फैसले से पहले सीजेआई रंजन गोगोई (Ranjn Gogoi) ने कहा था कि पारदर्शिता के नाम पर एक संस्था को नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए।

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