भाजपा की सख्ती से पिघले नीतीश

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लोकसभा चुनाव राजनीतिक दलों के बीच होगा या ‘मोदी बनाम बाकी सब’ यह कहना तो मुश्किल है, लेकिन कई अटकलों के बाद यह तो साफ़ है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भाजपा का साथ नहीं छोड़ेंगे| लोकसभा चुनाव को अब एक साल से भी कम समय बचा है और ऐसे में सभी की निगाहें बिहार में गठबंधन की राजनीति पर टिकी हैं| इस बीच बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के अध्यक्ष नीतीश कुमार ने पार्टी नेताओं को यह साफ कर दिया है कि बिहार में भाजपा के साथ गठबंधन जारी रहेगा|

अटकलों पर विराम लगाते हुए जेडीयू ने यह साफ कर दिया है कि वह बिहार में भाजपा के साथ गठबंधन के लिए तैयार है, लेकिन सीटों के तालमेल को लेकर मामला फंस सकता है| इस बारे में नीतीश कुमार 12 जुलाई को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से चर्चा करेंगे| सूत्रों के मुताबिक पार्टी के नेताओं ने बताया है कि बैठक में सहमति बनी है कि गठबंधन में जेडीयू को 17 सीटें मिलनी चाहिए| इससे पहले पार्टी के नेता 20 से 25 सीटों की मांग कर रहे थे|

गौरतलब है कि जेडीयू ने 2009 में बीजेपी के साथ गठबंधन किया था और उसे 25 सीटें मिली थीं| दूसरी ओर 2014 का चुनाव भाजपा ने रामविलास पासवान एलजेपी और उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएसपी के साथ मिलकर लड़ा था| इसमें भाजपा को 22 सीट, एलजेपी को 6 सीट और आरएलएसपी को 3 सीट पर जीत मिली| जीती हुए सीटों को छोड़ने के बाद केवल 9 सीट बचती हैं| ऐसे में जेडीयू के लिए 17 सीट छोड़ना मुश्किलभरा हो सकता है|

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