निर्भया के हत्यारों ने फांसी से बचने के लिए शुरू की ये घटिया हरकत

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निर्भया गैंगरेप (Nirbhaya Gang Rape) मामले में एक बार फिर डेथ वारंट (Nirbhaya Convict Death Warrant) जारी कर दिया गया है और हत्यारों (Nirbhaya Convict Vinay Sharma Injured) की फांसी 3 मार्च सुबह 6 बजे मुकर्रर कर दी गई है। फांसी की तारिख तय हो जाने के बाद निर्भया के हत्यारे अपनी मौत से किस कदर घबरा गए हैं इस बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता कि पहले फांसी से बचने के लिए अपराधियों ने कानूनी दांव-पेंचों का सहारा लिया और एक-एक करके कानूनी तरीकों का इस्तेमाल किया। रिव्यू पिटीशन और क्यूरेटिव पिटीशन (Curative Petition) जैसे हथकंडों को अपनाया लेकिन जब इन सभी को खारिज कर दिया गया और उनके सारे विकल्प समाप्त हो गए तो अब उन्होंने एक नया हथकंडा अपनाया है।

दरअसल डेथ वारंट (Nirbhaya Convicts Death Warrant) जारी हो जाने के बाद अपराधियों की सुरक्षा का बेहद ख़ास ख्याल रखा जाता है क्योंकि फांसी से पहले उनका स्वास्थ्य पूरी तरह से ठीक रहना बेहद जरूरी है। इसी बात का फायदा निर्भया के हत्यारे उठा रहे हैं। खबर सामने आई है कि सोमवार को अपराधी विनय शर्मा (Nirbhaya Convict Vinay Sharma Injured)  ने जेल की दीवार पर अपना सिर पटक कर खुद को घायल कर लिया। इतना ही नहीं उसने जेल की ग्रिल में अपना हाथ फंसकर अपने हाथ को तोड़ने की भी कोशिश की। हालांकि वार्डन ने उसे ऐसा करने से तो रोक लिया लेकिन फिर भी विनय (Nirbhaya Convict Vinay Sharma) ने खुद को घायल कर लिया। विनय को अस्पताल ले जाया गया और प्राथमिक उपचार के बाद उसे छुट्टी दे दी गई।

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गौरतलब है कि विनय शर्मा (Nirbhaya Convict Vinay Sharma Injured)  तिहाड़ जेल की बैरक नंबर 3 में है और डेथ वारंट (Nirbhaya Convict Vinay Sharma Death Warrant) जारी होने के बाद जेल के वार्डन-इन-चार्ज ने चारों अपराधियों की सुरक्षा बेहद कड़ी कर दी बावजूद इसके विनय ने खुद को घायल कर ही लिया। वहीं विनय के वकील एपी सिंह का कहना है कि विनय ने 16 फ़रवरी को खुद को घायल किया लेकिन उन्हें इसकी जानकारी 17 फ़रवरी को विनय की मां से मिली। एपी सिंह का कहना है कि घटना के अगले दिन यानी 17 फ़रवरी को विनय ने अपनी मां को भी पहचानने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि फिलहाल विनय की दिमागी हालत ठीक नहीं है और डेथ वारंट जारी होने से उसकी हालत और भी ज्यादा ख़राब हो गई है। वकील एपी सिंह (Lawyer A.P Singh)   के इस बयान पर जेल अधिकारियों का कहना है कि विनय की हालत पूरी तरह से ठीक है क्योंकि उसके साथ बातचीत करने पर इसके कोई भी संकेत नहीं मिले हैं जिससे यह कहा जाए कि उसकी दिमागी हालत खराब है। वहीं एक अधिकारी ने कहा, “वह बिल्कुल स्वस्थ है और हाल ही में हुए साइकोमेट्री टेस्ट में वह बिल्कुल दुरुस्त निकला।” जेल के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि डेथ वारंट जारी हो जाने के बाद से चारों अपराधियों का रवैया जेल वॉर्डन और गार्ड के साथ बेहद ही आक्रामक (Nirbhaya Convict Vinay Sharma Injured)  हो गया है और उनका व्यवहार अचानक से बदल गया है। उन्होंने जानकारी दी कि हालांकि उनके खान-पान में कोई भी अंतर नहीं आया है। पहले विनय शर्मा और मुकेश सिंह (Nirbhaya Convict Mukesh Singh)ने जरूर खाना खाने से इंकार कर दिया था लेकिन जब उन्हें काफी मनाया गया तो वे मान गए।

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आपको बता दें कि निर्भया के एक हत्यारे ने जेल में ही आत्महत्या कर ली थी वहीं एक अन्य नाबालिग आरोपी (Juvenile Convict) को जुवेनाइल कोर्ट भेजा गया था, और बाकी चार आरोपियों मुकेश (Mukesh), अक्षय (Akshay), विनय (Nirbhaya Convict Vinay Sharma Injured) और पवन (Pawan Gupta) की सुनवाई चल रही थी। अब इन चारों के खिलाफ डेथ वारंट जारी होने के बाद इनकी सुरक्षा कड़ी कर दी गई है ताकि कोई भी आत्महत्या करने की कोशिश नहीं करे। इन चारों अपराधियों पर कड़ी नजर रखने के लिए वॉर्डन्स को चौबीसों घंटे दोषियों के सेल में लगे सीसीटीवी कैमरों पर पर नजर रखने का आदेश दिया गया है इसके अलावा अपराधियों के सेल के बार सुरक्षा कर्मी तैनात किए गए हैं। चारों अपराधियों (Nirbhaya Convicts Tihar Jail) का जेल के दूसरे कैदियों के साथ भी सम्पर्क बेहद सीमित कर दिया गया है ताकि किसी का उनसे भावनात्मक रिश्ता कायम न हो जाए। वहीं एक्सपर्ट्स का कहना है चारों को अपने माता-पिता से मिलने की पूरी इजाजत है लेकिन कई बार वे मुलाक़ात से इंकार कर चुके हैं। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि कई बार डेथ वारंट (Nirbhaya Convict Vinay Sharma Injured)  जारी होने के बाद अपराधी हिंसक व्यवहार अपना लेते हैं ताकि उन्हें चोट पहुंचे या उनका स्वास्थ खराब हो जाए और उनकी फांसी कुछ और वक़्त के लिए टाल दी जाए। अगर किसी किसी दोषी को फांसी की सजा सुनाई गई है और वह जेल में घायल हो जाता है, उसकी हालत बिगड़ जाए, स्वास्थ्य खराब हो जाए या फिर उसका वजन कम हो जाए तो उसके पूर्णतः स्वास्थ्य होने तक फांसी टाली जा सकती है।

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Prabhat Jain

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