निर्भया केस : दोषियों को 3 मार्च को फांसी होगी या नहीं?

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निर्भया गैंगरेप (Nirbhaya Gang Rape and Murder) मामले (Nirbhaya Case Petition Postponed) में आज यानी 25 फ़रवरी को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में केंद्र सरकार की याचिका पर सुनवाई की जानी थी। यह सुनवाई सुप्रीम कोर्ट (supreme Court)  ने आगामी 5 मार्च तक के लिए टाल दी है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा यह याचिका टाले जाने पर यह सवाल उठ रहा है कि क्या अब दोषियों को 3 मार्च को फांसी दी जाएगी या नहीं? बता दें कि पटियाला हाउस कोर्ट (Patiala House Court) ने 17 फ़रवरी 2020 को नया डेथ वारंट (Nirbhaya Convicts Death Warrant) किया था जिसके तहत चारों दोषियों को 3 मार्च को फांसी दी जानी है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा 5 मार्च तक सुनवाई टाली जाने के बाद से यह संशय बना हुआ है कि तीसरी बार डेथ वारंट जारी होने के बाद भी दोषियों की फांसी टलेगी या नहीं। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका (Nirbhaya convicts petition) में दोषियों को अलग-अलग फांसी (Nirbhaya Case Petition Postponed) दी जाने की मांग की थी। गृह मंत्रालय (Home Minister) द्वारा दायर इस याचिका पर जस्टिस आर भानुमति के नेतृत्व में तीन जजों वाली सुप्रीम कोर्ट (supreme court)की बेंच 5 मार्च को सुनवाई करेगी।

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बता दें कि चारों दोषियों (Nirbhaya Case Petition Postponed) के खिलाफ यह तीसरी बार डेथ वारंट जारी किया गया है। इससे पहले 2 बार जारी किए गए डेथ वारंट (Death warrant) के बाद भी दोषियों को फांसी नहीं दी जा सकी थी। चारों दोषियों को सबसे पहले जो डेथ वारंट जारी किया गया था उसके तहत चारों को 22 जनवरी 2020 को फांसी दी जानी थी लेकिन 17 जनवरी को अदालत ने इसे खारिज कर दिया और नयी तारीख 1 फ़रवरी मुकर्रर कर दी। अदालत के इस आदेश के बाद सभी को लगा कि 1 फ़रवरी को सभी आरोपियों को फांसी दे दी जाएगी लेकिन निचली अदालत ने 31 जनवरी को अगले आदेश तक इस फांसी पर रोक लगा दी। अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि दोषियों के अभी तक सारे कानूनी विकल्प समाप्त नहीं हुए हैं इसलिए उन्हें फांसी नहीं दी जा सकती उन्हें अपने विकल्प इस्तेमाल करने का मौका दिया जाना चाहिए।

Nirbhaya Convicts Death Warrant Petition : निर्भया को दोषियों को फांसी नहीं!

हालांकि चारों दोषियों में से तीन दोषियों (Nirbhaya Convicts Delay in Hanging) ने अपने सारे कानूनी विकल्प इस्तेमाल कर लिए हैं जबकि पवन गुप्ता (Nirbhaya Case Petition Postponed) एक मात्र दोषी बचा है जिसके पास सुधारात्मक याचिका दायर करना का विकल्प मौजूद है और उसने अभी तक अपना विकल्प न तो इस्तेमाल किया है और न ही उसकी मंशा कोई विकल्प इस्तमाल करने की लगती है। बार-बार इन्ही कानूनी दांव-पेंचों के चलते दोषियों की फांसी टाली जा रही है। केंद्र सरकार ने इसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की और कहा कि जिन दोषियों के सारे विकल्प समाप्त हो चुके हैं उन्हें फांसी दी जानी चाहिए। गौरतलब है कि दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा था कि चारों दोषियों को एक साथ फांसी दी जाएगी। हाई कोर्ट (high court) के इस आदेश को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और अपनी याचिका में कहा कि, हाई कोर्ट का यह कहना कि सभी दोषियों को एक साथ फांसी दी जाएगी, गलत है। जिन दोषियों के सारे कानूनी विकल्प समाप्त हो चुके हैं, उन्हें फांसी देने की इजाजत दी जाए। आज इस याचिका पर सुनवाई की जानी थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे 5 मार्च तक के लिए टाल दिया। दोषियों को तीसरी बार डेथ वारंट (Third Death warrant) जारी होने पर निर्भया की मां आशा देवी (Nirbhaya’s mother Aasha Devi) ने कोर्ट के फैसले पर संतोष जताया था। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि, “मैं बहुत खुश नहीं हूं, क्योंकि यह तीसरी बार है जब डेथ वारंट जारी किया गया। हमने अब तक बहुत संघर्ष किया है, इसलिए मैं संतुष्ट हूं कि आखिरकार डेथ वारंट जारी किया गया है। मुझे उम्मीद है कि उन्हें (दोषियों को) (Nirbhaya Case Petition Postponed) 3 मार्च को फांसी दी जाएगी।” वहीं अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा 5 मार्च को सुनवाई की तारीख मुक़र्रर कर दिए जाने पर निर्भया की मां  का यही सवाल है कि दोषियों को फांसी (Nirbhaya convicts hanging date) होगी या फिर नहीं।

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Prabhat Jain

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