निर्भया केस : अब तीसरे दोषी अक्षय ने राष्ट्रपति के पास दाखिल की दया याचिका, निर्भया कि मां बोली- लड़ाई जारी रहेगी

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(Nirbhaya Convict Akshay Filed Petition) निर्भया गैंगरेप और हत्या (Nirbhaya Gagrape and Murder) के मामले में दोषी विनय शर्मा (Vinay Sharma Mercy Petition) की दया याचिका खारिज हुई तो अब तीसरे दोषी अक्षय कुमार सिंह (Akshay Kumar Singh) ने राष्ट्रपति (Indian President Ramnath Kovind)  के समक्ष दया याचिका दाखिल कर मौत की सजा माफ करने की गुहार लगाई है। ये तीसरी दया याचिका है जो राष्ट्रपति के पास लगाई गई है। दोषी मुकेश और विनय की दया याचिका खारिज हो चुकी हैं जबकि चौथे दोषी पवन ने अभी तक दया याचिका के विकल्प का इस्तेमाल नहीं किया है। वैसे इस मामले में सजायाफ्ता मुकेश सिंह के सभी विकल्प जिसमें क्यूरेटिव याचिका (Curative Petition)  और दया याचिका शामिल (Nirbhaya Convict Akshay Filed Petition) हैं, खत्म हो चुके हैं। दया याचिका (Mercy Petition) खारिज करने को चुनौती देने वाली याचिका भी सुप्रीम कोर्ट खारिज कर चुका है। दोषी (Nirbhaya Convicts) पवन गुप्ता (Pawan Gupta) के पास अभी दोनों विकल्प क्यूरेटिव और दया याचिका उपलब्ध हैं। तीसरे दोषी अक्षय ठाकुर की सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव याचिका (Curative Petition) खारिज हो चुकी है और अब उसने दया याचिका के संवैधानिक विकल्प को चुना है। जबकि चौथे दोषी विनय शर्मा (Vinay Sharma) की क्यूरेटिव याचिका (Curative Petition) पहले ही खारिज हो चुकी है और राष्ट्रपति ने भी दया याचिका खारिज कर दी है। शुक्रवार को सभी दोषियों द्वारा सभी उपचार पूरे ना करने के चलते फांसी को अगले आदेश तक टाल दिया था। अब तिहाड़ जेल (Tihar Jail) की ओर से पटियाला हाउस कोर्ट (Patiala House Court) में ये स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की जाएगी। आपको बता दें कि आज इन चारों दोषियों को सुबह 6 बजे फांसी होनी थी, लेकिन शुक्रवार को उसे टाल दिया गया था। अभी फांसी की नई डेट नहीं आई है।

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निर्भया के चारों दोषियों (Nirbhaya Convicts Death Warrant) फांसी दूसरी बार भी टल गई। दोषियों ने विकल्प बचे होने की दलील देकर शनिवार सुबह होने वाली फांसी टालने की गुहार लगाई थी (Nirbhaya Convict Akshay Filed Petition)। इस पर पटियाला हाउस कोर्ट (Patiala House Court) ने डेथ वॉरंट (Death Warrant) पर अमल अगले आदेश तक टाल दिया। कोर्ट ने कहा, सजा पर अमल तब तक नहीं होगा, जब तक सभी की अपील खारिज न हो जाएं या उन्हें दायर करने का वक्त न खत्म हो जाए। कानूनी उपायों में जुटे दोषी से आंख मूंदकर भेदभाव नहीं किया जा सकता। विनय ने दया याचिका (Nirbhaya Convict Akshay Filed Petition) लंबित होने की दलील दी। पवन, अक्षय ने कहा कि उनके कानूनी विकल्प बचे हैं।

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मौज में दुष्कर्मी की सजा न्यायव्यवस्था नहीं, निर्भया की माँ भुगत रही | Nirbhaya Case

मौज में दुष्कर्मी की सजा न्यायव्यवस्था नहीं, निर्भया की माँ भुगत रही | Nirbhaya Caseपुरानी फिल्मों में अक्सर आपने देखा होगा कि जब विलेन हीरो से नही निपट पाता तब वो उसकी माँ, बहन या प्रेमिका का अपहरण कर लेता है। ऐसी स्थिति में हीरो को मजबूर होना पड़ जाता है विलेन की बात मानने के लिए। हालांकि कई बार इसका उल्टा भी होता है। जैसे फ़िल्म 'शोले' में वीरू को बांध दिया जाता है तो बसंती को जबरन गब्बर सिंग के सामने नाचना पड़ता है। ऐसे दृश्य भावनात्मक रूप से दर्शकों को झकझोर देतें है। लेकिन फिल्में भी असल जिंदगी से ही निकलती है।#Nirbhaya #NirbhayaCase #nirbhayaconvicts #JusticeforNirbhaya #nirbhayabetrayed #NirbhayaVerdict

Talented India News द्वारा इस दिन पोस्ट की गई शनिवार, 1 फ़रवरी 2020

वहीं, दूसरी तरफ फांसी की सजा टाले जाने (Nirbhaya Convict Akshay Filed Petition) के बाद मीडिया से बातचीत में निर्भया की मां आशा देवी (Nirbhaya’s mother Asha Devi)  भावुक हो गईं और उन्होंने कहा, दोषियों के वकील एपी सिंह ने मुझे चुनौती देते हुए कहा कि दोषियों को कभी भी फांसी नहीं दी जाएगी. लेकिन मैं अपनी लड़ाई जारी रखूंगी. सरकार (Government) को और अदालत को इन दोषियों को फांसी देनी ही होगी.निर्भया की मां ने दिल्ली की एक अदालत द्वारा दोषियों की फांसी के मृत्यु वारंट पर अमल को टाले जाने के बाद कहा, हमारी उम्मीदें टूट चुकी हैं, लेकिन मैं दोषियों को फांसी पर लटकाए जाने तक लड़ाई जारी रखूंगी. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, इस बात से मुझे दुख पहुंचा है कि निर्भया मामले के दोषी कानून की कमियों का फायदा उठा कर फांसी से बच रहे हैं.

शुक्रवार सुबह उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को निर्भया (Nirbhaya Convict Akshay Filed Petition) मामले के चार दोषियों में से एक पवन गुप्ता की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उसने खुद के नाबालिग होने के दावे को खारिज करने के फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया था. पवन गुप्ता की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई न्यायमूर्ति आर भानुमति, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना की पीठ ने चेंबर में की थी उच्चतम न्यायालय ने 20 जनवरी को पवन की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उसने नाबालिग होने के अपने दावे को खारिज करने के, दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी थी. फैसला आने से पहले मामले में पवन की ओर से पेश वकील एपी सिंह ने कहा कि उन्होंने शीर्ष न्यायालय के 20 जनवरी के आदेश पर पुनर्विचार का अनुरोध करते हुए शुक्रवार को अपने मुवक्किल की ओर से एक याचिका दायर की थी

याचिका (Nirbhaya Convict Akshay Filed Petition) खारिज करते हुए शीर्ष न्यायालय ने कहा था कि पवन की याचिका को खारिज करने वाले उच्च न्यायालय के फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है और उच्च न्यायालय के साथ-साथ निचली अदालत ने उसके दावे को सही तरीके से खारिज किया. न्यायालय ने कहा था कि उच्चतम न्यायालय के समक्ष पुनर्विचार याचिका में पहले इस मामले को उठाया गया और शीर्ष न्यायालय ने पवन तथा अन्य सह-आरोपी विनय कुमार शर्मा के नाबालिग होने के दावे वाली याचिका को खारिज कर दिया.

एपी सिंह (A.P Singh)  ने दलील दी थी कि पवन (Nirbhaya Convict Akshay Filed Petition) के स्कूल छोड़ने के प्रमाणपत्र के अनुसार अपराध के समय वह नाबालिग था और निचली अदालत तथा उच्च न्यायालय समेत किसी भी अदालत ने उसके दस्तावेजों पर कभी विचार नहीं किया. दिल्ली पुलिस (Delhi Police) की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि पवन के नाबालिग होने के दावे का हर न्यायिक मंच पर विचार किया गया और अगर दोषी को बार-बार तथा इस समय अपने दावे को उठाने दिया जाता है तो यह न्याय का मखौल उड़ाना होगा.

(Nirbhaya Convict Akshay Filed Petition) निचली अदालत ने मामले में सभी चारों दोषियों मुकेश कुमार सिंह (32), पवन (25), विनय (26) तथा अक्षय (31) को एक फरवरी को सुबह छह बजे तिहाड़ जेल में फांसी देने के लिए दूसरी बार 17 जनवरी को ब्लैक वारंट जारी किया था. इससे पहले अदालत ने सात जनवरी को दिए एक आदेश में 22 जनवरी को फांसी दिए जाने का वारंट जारी किया था। अभी केवल मुकेश ने दया याचिका (Nirbhaya Convict Akshay Filed Petition) समेत सभी कानूनी उपायों का इस्तेमाल कर लिया है. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 17 जनवरी को उसकी दया याचिका खारिज कर दी थी और इसके खिलाफ अपील को उच्चतम न्यायालय ने 29 जनवरी को खारिज कर दिया था.

शीर्ष न्यायालय ने 30 जनवरी को दोषी अक्षय की सुधारात्मक याचिका खारिज (Nirbhaya Convict Akshay Filed Petition) कर दी थी. अन्य दोषी विनय ने 29 जनवरी को राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दायर की जो अभी लंबित है. सिंह ने एक फरवरी को फांसी दिए जाने पर रोक लगाने की मांग करते हुए निचली अदालत का भी रुख किया..उन्होंने कहा कि कुछ दोषियों ने अभी कानूनी उपायों का इस्तेमाल नहीं किया है. गौरतलब है कि 23 वर्षीय परा चिकित्सा की छात्रा से 16 दिसम्बर 2012 को दक्षिणी दिल्ली में एक चलती बस में सामूहिक बलात्कार किया गया था. करीब 15 दिन बाद उसने सिंगापुर के एक अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था.

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-Mradul tripathi

 

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