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Nathuram Godse ने इसलिए की थी Gandhiji की हत्या

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इन दिनों देश की राजनीति में नाथूराम गोडसे (Nathuram Godse) का नाम सबसे अधिक चर्चा का विषय है| पहले कमल हासन ने विवादित बयान देते हुए गोडसे को पहला हिन्दू आतंकवादी बताया था | इसके बाद भोपाल से भाजपा की प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा ने नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताया था, जिसे लेकर काफी विवाद हुआ |

बाद में साध्वी को अपने इस बयान पर माफी मांगना पड़ी थी| आज यानी 19 मई को नाथूराम गोडसे (Nathuram Godse Birthday 2019) का जन्म हुआ था| आइये जानते हैं कि नाथूराम गोडसे कौन था और उसने गांधीजी (mahatma gandhi) की हत्या क्यों की थी ?

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नाथूराम गोडसे (Nathuram Godse Birthday 2019) का जन्म 19 मई 1910 को महाराष्ट्र के पुणे के पास बारामती में एक मराठी ब्राह्मण परिवार में हुआ था | उनके पिता विनायक वामनराव गोडसे पोस्ट ऑफिस में काम किया करते थे | नाथूराम का बचपन का नाम रामचंद्र था|  ब्राह्मण परिवार में जन्म होने के कारण पूजा-पाठ में धार्मिक कार्यों में शुरू से ही गहरी रुचि थी|

इनके छोटे भाई गोपाल गोडसे का कहना था कि नाथूराम बचपन में ध्यानावस्था में ऐसे-ऐसे श्लोक बोलते थे जो उन्होंने कभी भी पढ़े ही नहीं थे और जानते भी नहीं थे| वे ध्यानावस्था में अपने परिवारवालों और उनकी कुलदेवी के मध्य एक सूत्र का कार्य किया करते थे और ये सब 16 वर्ष की आयु तक ही चला और अपने आप खत्म हो गया| पुराणों आदि में उनकी गहरी रुचि थी| उन्होंने  स्वामी विवेकानंद, स्वामी दयानंद, बालगंगाधर तिलक तथा  महात्मा गांधी के साहित्य का बड़ी गहराई से अध्ययन किया था|

वे कट्टर हिन्दू थे| यही कारण था कि वे हिन्दुओं के प्रति कोई गलत बात भी नहीं सुनते थे और शुरू के दिनों में राजनीतिक जीवन में  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में शामिल हो गए और बाद में सन् 1930 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ छोड़ कर अखिल हिन्दू महासभा में चले गए| उन्होंने अग्रणी तथा हिन्दू राष्ट्र नामक दो समाचार पत्रों का सम्पादन भी किया था और वे मुहम्मद अली जिन्ना की अलगाववादी विचारधारा का विरोध करते थे|

इसलिए मारी गांधीजी (Mahatma Gandhi) को गोली

शुरू के दिनों में उसने महात्मा गांधीजी के कार्यक्रमों का समर्थन किया परन्तु बाद में वह मानने लगा था कि गांधीजी लगातार हिन्दुओं के विरुद्ध भेदभावपूर्ण नीति तथा मुस्लिम तुष्टिकरण अपना रहे हैं, इसी कारण वह गांधीजी का दुश्मन बन गया था| सन् 1947 में भारत का विभाजन हुआ था और विभाजन के समय हुए साम्प्रदायिक हिंसा ने नाथूराम (Nathuram Godse) को अत्यंत उद्वेलित कर दिया| नाथूराम ने उस समय की त्रासदी के पीछे भी महात्मा गांधी (mahatma gandhi)  को ही सबसे ज्यादा जिम्मेदार समझा था| यही मुख्य कारण था, जो उसने गांधीजी को गोली मार दी थी|

इन्होंने महात्मा गांधी को पाकिस्तान का राष्ट्रपिता बताया

एक कारण यह भी

जब भारत के विभाजन का समझौता हुआ तो भारत ने पाकिस्तान को 75 करोड़ रुपए देने थे और उसमें से 20 करोड़ भारत ने दिए थे और उसी समय पाकिस्तान आक्रमण कर दिया था| तब तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभ भाई पटेल ने पाकिस्तान को बाकी पैसे देने से मना करने का फैसला लिया, लेकिन गांधीजी इसके खिलाफ अनशन पे बैठ गए और गांधीजी का यह निर्णय किसी को भी नहीं अच्छा लगा| गांधी जी के अनशन पे बैठने से सभी लोग दुखी थे| गोडसे (Nathuram Godse) और उनके मित्र भी महात्मा गाँधी (mahatma gandhi)  की इस हरकत से नाराज़ थे, तब उन्होंने गांधी जी को मारने का निर्णय लिया|

पहले भी कर चुके थे गांधीजी को मारने की कोशिश

आप यह नहीं जानते होंगे कि गांधीजी को उनकी हत्या के 10 दिन पहले भी मारने की कोशिश की गई थी | दरअसल, 20 जनवरी 1948 को नई दिल्ली के बिरला हाउस पहुंचकर नाथूराम के साथी मदनलाल पाहवा ने गाँधी (mahatma gandhi)  की अनशन सभा में बम फेंका| योजना के अनुसार, बम विस्फ़ोट से उत्पन्न अफरा-तफरी के समय गांधीजी को मारना था| परन्तु उस समय उसकी पिस्तौल ही जाम हो गयी थी और एकदम चल न सकी और गोडसे (Nathuram Godse) और उनके साथी भाग कर पुणे वापस आ गए| मदनलाल पाहवा पकड़े गए|

ऐसे की गांधीजी की हत्या

30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे (Nathuram Godse) दिल्ली के बिडला भवन में प्राथना-सभा से करीब 40 मिनट पहले ही पहुँच चुके थे| जैसे ही गांधी प्रार्थना-सभा के लिए परिसर में दाखिल हुए ही थे कि नाथूराम गोडसे सामने आ गए और उन्हें दोनो हाथों से नमस्कार किया और बिना किसी देरी के अपनी पिस्तौल से तीन गोलियां चला दी, जिस कारण गांधीजी (mahatma gandhi) की मृत्यु हो गई|

गोली मारने के बाद गोडसे (Nathuram Godse) ने भागने की जरा सी भी कोशिश नहीं की थी| गोडसे का कहना था की गांधीजी अपनी मर्जी की करते थे| वे कभी भी भारत के बारे में सही फैसले नहीं लेते थे और किसी भी बात को मनवाने के लिए अनशन पर बैठ जाते थे| ऐसा करके उन्हें किसी भी प्रकार का दुःख नहीं है| नाथूराम गोडसे पर महात्मा गांधी (mahatma gandhi) की हत्या के लिए अभियोग पंजाब उच्च न्यायालय में चलाया गया था| इसके अतिरिक्त उन पर 17 अभियोग चलाए गए|

गोडसे की देशभक्ति पर आनंद महिंद्रा ने कहा ….

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