अब संसद की कैंटीन में नहीं मिलेगा सब्सिडी वाला सस्ता खाना

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आपको बता दे की संसद भवन की कैंटीन (Parliament Canteen) का सस्ता खाना कई लोगों के आँखों की किरकिरी बना हुआ था हाल ही में जब जेएनयू में बच्चों की फीस बढ़ी तो कुछ लोगों ने कहा टैक्सपेयर्स के पैसे की बर्बादी है. सामने से तर्क आए, ‘संसद की कैंटीन में भी खाना अति-सस्ता है (Food In Parliament Canteen). वहां तो क्या वहां टैक्सपेयर्स के पैसे स्वार्थ में लग रहे हैं. लेकिन अब ये तर्क कुतर्क खत्म हुआ क्यूंकि संसद कैंटीन (Parliament canteen) में अब सांसदों को सस्ता भोजन (subsidised food) नहीं मिलेगा. कैंटीन में खाने के दाम उसकी लागत के हिसाब से तय होंगे, क्योंकि संसद भवन (Parliament) की कैंटीन को दी जाने वाली सब्सिडी (subsidy) खत्म करने का फैसला लिया गया है. संसद (Parliament) के शीतकालीन सत्र में सभी राजनीतिक पार्टियों ने तय किया कि संसद भवन की कैंटीन में मिलने वाले खाने पर सब्सिडी खत्म की जाए. सभी पार्टियों की आम सहमति के बाद लोकसभा स्पीकर (Lok Sabha) ने कैंटीन को दी जाने वाली सब्सिडी को खत्म करने की घोषणा की. आपको बता दें अभी तक सरकार का 17 करोड़ रुपये संसद कैंटीन की सब्सिडी पर खर्च होता है.

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लोकसभा सचिवालय के गुरुवार को दिए एक वक्तव्य में बताया गया है कि 1 जनवरी से संसद की कैंटीन ‘नो-प्रोफिट (Food In Parliament Canteen), नो-लॉस’ पर चलायी जाएगी. बता दें कि ​कैंटीन की कीमतें पिछली बार साल 2010 में बढ़ाई गई थीं. संसद में सस्ती दरों पर मिल रहे खाने को लेकर कई बार आलोना होती रही है. मंहगाई के दौरान भी यह मसला उठा था कि देश भर के लोग महंगा खाना खा रहे हैं और संसद में बेहद कम दामों पर खान दिया जा रहा है. इसके बाद कीमत बढ़ाई गई थीं.

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आरटीआई से मिली एक जानकारी के अनुसार संसद में कैंटीन को पिछले पांच सालों में 60.7 करोड़ की सब्सिडी दी गई है यह फैसला संसदीय खाद्य समिति की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है. अध्यक्ष ने इस समिति को कैंटीन को मिलने वाली सब्सिडी के मामले पर विचार करने के लिए गठित किया था. नए नियम के अनुसार कीमतें कुछ इस तरह होंगी. जो वेज थाली 18 रुपये में मिलती थी वो अब 30 रुपये में मिलेगी. वहीं नॉन-वेज थाली 33 रुपये की बजाये 60 रुपये में मिलेगी. इसी तरह चिकन करी 29 रुपये की बजाये 61 रुपये में मिलेगी.

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-Mradul tripathi

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