पत्रकारों की मान्यता पर मोदी का फैसला

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फर्जी खबरों पर रोक लगाने के लिए सरकार ने फैसला लिया था कि कोई पत्रकार  फर्जी खबरों का दुष्प्रचार करते हुए पाया जाता है तो उसकी मान्यता स्थायी रूप से रद्द की जा सकती है, लेकिन इस फैसले के जारी होने के बाद ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे वापस लेने का फैसला ले लिया| मोदी ने साफ किया कि ऐसा कोई भी फैसला नहीं लिया जाएगा| उन्होंने कहा कि फेक न्यूज से जुड़े सभी मामले भारतीय प्रेस परिषद (पीसीआई) में देखे जाएंगे| 

गौरतलब है कि सोमवार को केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने विज्ञप्ति जारी की थी कि फेक न्यूज लिखने वाले पत्रकारों की मान्यता हमेशा के लिए खत्म कर दी जाएगी|

सरकार द्वारा लिए गए इस फैसले पर कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने सवाल उठाए थे| उन्होंने इस फैसले पर कहा कि पत्रकारों को खुलकर न्यूज़ रिपोर्टिंग करने से रोकने की मंशा से यह कदम उठाया है| उन्होंने यह भी कहा कि आखिर यह कैसे पता चलेगा कि कोई खबर फेक है या सही और इसका इस्तेमाल पत्रकारों के शोषण में भी किया जा सकता है|

इसके साथ ही अहमद पटेल ने सरकार से कुछ सवाल भी पूछे, जिनके जवाब में केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने अहमद पटेल के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि गैर-सरकारी संस्थाएं प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और न्यूज़ ब्रॉडकास्टर एसोसिएशन ही खबरों की पड़ताल करके यह फैसला लेंगी कि न्यूज़ फेक है या नहीं|

ये थे प्रावधान

पहली बार फेक न्यूज साबित होने पर 6 महीने के लिए पत्रकार की मान्यता निलंबित किए जाने का प्रावधान था|  दूसरी बार सालभर के लिए और तीसरी बार ऐसी शिकायत मिलने पर हमेशा के लिए मान्यता रद्द किए जाने का प्रावधान था|

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