मोदी सरकार NRC, CAA के बाद लेकर आई NPR, अब भारत का हर एक नागरिक गिना जाएगा

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नई दिल्ली: देशभर में इन दिनों NRC, CAA को लेकर घमासान मचा हुआ है। पूरे देश में CAA के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है. जगह-जगह हिंसा और आगजनी की घटनाएं सामने आ रही है। अभी CAA का मुद्दा शांत नहीं हुआ और अब सरकार NPR लेकर आई है (NPR After NRC CAA) . इस नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (NPR) के अंतर्गत 1 अप्रैल 2020 से 30 सितंबर 2020 तक असम के लिए अलावा देशभर में घर- घर जाकर ये जनगणना की जाएगी। नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (NPR) में प्रत्येक नागरिकों को जानकारी रखी जाएगी। ये नागरिकता अधिनियम 1955 के प्रावधानों के तहत स्थानीय, उप-जिला, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जाता है। आपको बता दें, कोई भी निवासी जो 6 महीने या उससे अधिक समय से स्थानीय क्षेत्र में निवास कर रहा है तो उसे NPR में अनिवार्य रूप से पंजीकरण करना होता है।

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NPR की प्रक्रिया-

आपको बता दें की नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (NPR After NRC CAA) में तीन प्रक्रिया होगी। पहले चरण में अगले साल एक अप्रैल 2020 लेकर से 30 सितंबर के बीच केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारी घर-घर जाकर आंकड़े जुटाएंगे। वहीं दूसरे में चरण 9 फरवरी से 28 फरवरी 2021 के बीच पूरा होगा। तीसरे चरण में संशोधन की प्रक्रिया 1 मार्च से 5 मार्च के बीच होगी। भारत सरकार ने अप्रैल 2010 से सितंबर 2010 के दौरान जनगणना 2011 के लिए घर-घर जाकर सूची तैयार करने तथा प्रत्येक घर की जनगणना के चरण में देश के सभी सामान्य निवासियों के संबंध में विशिष्ट सूचना जमा करके इस डेटाबेस को तैयार करने का कार्य शुरू किया था।

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केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा संवैधानिक है सीएए-

केंद्रीय गृह मंत्रालय Union Ministry of Home Affairs के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकारों को सीएए को खारिज करने की कोई शक्ति प्राप्त नहीं है क्योंकि इसे संविधान की सातवीं अनुसूची की संघ सूची के तहत लाया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें एनपीआर (NPR After NRC CAA)  को भी लागू करने से इनकार नहीं कर सकतीं, जो अगले साल लाया जाना है। उनका बयान पश्चिम बंगाल, पंजाब, केरल, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों की उस घोषणा के बाद आया, जिसमें उन्होंने सीएए को असंवैधानिक करार दिया और कहा कि उनके राज्यों में इसके लिए कोई जगह नहीं है।

पश्चिम बंगाल और केरल सरकार NPR के विरोध में –

ममता बनर्जी Mamata Banerjee एनआरसी  (NPR After NRC CAA) के ख़िलाफ़ हैं. बंगाल में अल्पसंख्यक बड़ा वोट बैंक है और वे निर्णायक स्थिति में हैं. तीन दशकों से भी अधिक समय तक ये वोट बैंक वामदल के साथ था. 2011 में जब ममता सत्ता में आईं तो ज़मीन अधिग्रहण विरोधी आंदोलनों के साथ उन्हें अल्पसंख्यक वोट बैंक का भी उनको समर्थन मिला और बंगाल में ये लगभग 30 फ़ीसदी हैं. पश्चिम बंगाल West Bengal के बाद केरल सरकार ने भी राज्य में राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी (NPR ) से जुड़े सभी काम रोकने के आदेश दिए हैं। यह आदेश लोगों के बीच पैदा इस आशंका के मद्देनजर लिया गया कि विवादित संशोधित नागरिकता कानून (CAA )के बाद एनपीआर के जरिए राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) लागू किया जाएगा। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि सरकार ने एनपीआर को स्थगित रखने का फैसला किया है क्योंकि आशंका है कि इसके जरिए एनआरसी लागू की जाएगी।

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-Mradul tripathi

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