नीट में जीरो नंबर फिर भी एमबीबीएस में प्रवेश

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देश में रईस लोगों के साथ मिलकर कुछ भ्रष्टाचारी अधिकारी शिक्षा के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं| आए दिन ऐसी खबरें सामने आती रहती हैं, जिनमें बिना काबिलियत के सिर्फ पैसों के बल पर बड़े-बड़े शिक्षा संस्थानों में रईसों के बच्चों को उन सीटों पर दाखिला मिल जाता है, जिन पर किसी पढ़ने वाले ईमानदार बच्चे का अधिकार होता है| हाल ही में एक और ऐसे मामले का भंडाफोड़ हुआ है, जिसने शिक्षा व्यवस्था की एक बार फिर पोल खोल दी है|

दरअसल, डॉक्टर बनने के लिए आयोजित की जाने वाली परीक्षा ‘नीट’ में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है| वर्ष 2017 में बड़ी संख्या में ऐसे छात्रों को भी एमबीबीएस कोर्स में एडमिशन मिल गया है, जिनके नीट में जीरो या माइनस में नंबर आए थे| ऐसे लगभग 400 छात्र हैं, जिन्हें फिजिक्स और केमेस्ट्री में 10 से भी कम अंक प्राप्त हुए वहीं 110 ऐसे छात्र हैं, जिन्हें जीरो नंबर प्राप्त हुए हैं| इन सभी छात्रों को सिर्फ पैसों के बल पर दाखिला दिया गया है|

मामला उजागर होने के बाद सवाल उठाया जा रहा है कि यदि जीरो नंबर मिलने पर भी छात्रों को दाखिला दिया जा रहा है तो फिर ‘नीट’ की परीक्षा लेने की क्या ज़रूरत है? उन बच्चों के भविष्य का क्या, जो रात-दिन मेहनत करके डॉक्टर बनना चाहते हैं, लेकिन ऐसे धनवान माता-पिता के बच्चों की वजह से उनका सपना पूरा नहीं हो पाता है|

प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में लगभग 17 लाख ट्यूशन फीस प्रति वर्ष भरकर फर्जी छात्र दाखिला ले लेते हैं और बाद में डॉक्टर बन कर लोगों का भविष्य खतरे में डाल देते हैं| 17 लाख ट्यूशन फीस में हॉस्टल, मेस, लाइब्रेरी और अन्य खर्च शामिल नहीं है| इससे शिक्षा के नाम पर व्यवसाय कर रहे लोगों के मंसूबों का भी पता चलता है| कैसे लोगों ने शिक्षा की दुकान खोल रखी है और धड़ल्ले से ऐसे अज्ञानियों को दाखिला दिया जा रहा है, जिनके पास न ही ज्ञान है और न ही सीखने का गुण| उनके पास है तो सिर्फ रुपया|

नीट में कम नंबर आने के बाद भी छात्रों को मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश देने वाली अधिकतर यूनिवर्सिटी डीम्ड हैं, जिनके पास खुद की एमबीबीएस एग्जाम आयोजित करने का अधिकार है| ऐसी यूनिवर्सिटी फर्जी एग्जाम लेकर पैसों की लालच में छात्रों को दाखिला दे देती हैं| उन्हें कोई मतलब नहीं होता है कि छात्र कुछ सीखे या नहीं, लेक्चर अटैंड कर रहे हैं या नहीं| उन्हें मतलब होता है तो अपनी दुकान चलाने से|

गौरतलब है कि देश में ऐसे कई छात्र आत्महत्या कर लेते हैं, जो वर्षों से नीट या इसके जैसी ही अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियां कर रहे होते हैं और जो मामूली अंकों से कट ऑफ तक नहीं पहुंच पाते हैं| क्या इन छात्रों की सीट पर यूं अज्ञानी छात्रों को दाखिला देना न्याय है? क्या इन गतिविधियों से हमारा भविष्य सुरक्षित है? इन सब पर सरकार को सख्त कार्रवाई करने की आवश्यकता है|

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