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राममंदिर के लिए समर्पित था जो शख्स, आज सुन न सका फैसला

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वैसे तो अयोध्या (Ayodhya) विवाद पर फैसले का इंतज़ार पूरे देशवाशियों को था जो आज खत्म हो गया। लेकिन आयोध्या में ऐसा व्यक्ति था जिसने पूरी जिंदगी राममंदिर(Ram Temple) निर्माण के लिए काम किया लेकिन जिस दिन यह फैंसला आया है बदकिस्मती से वह आदमी आज इस दुनिया में है। जी हां अयोध्या (Ayodhya) के कारसेवकपुरम स्थित राम मंदिर निर्माण कार्यशाला (Ram Temple Workshop) के मुख्य कारीगर रजनीकांत सोमपुरा राममंदिर निर्माण की आस में 1990 से पत्थर तराशने का काम कर रहे थे और तब से लेकर अब तक उन्होंने ने लगभग हजारों टन पत्थरों को अपने हुनर से तराश (Stone Carving) डाला था। लेकिन बदकिश्मती से आज से कुछ महीनों पूर्व कारीगर रजनीकांत सोमपुरा का देहांत हो गया, जिसके बाद से पत्थर तराशने का काम पूरी तरह ठप हो गया.

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राम मंदिर निर्माण कार्यशाला में काम बंद होने पर विश्व हिंदू परिषद् के प्रवक्ता शरद शर्मा ने कहा है की ” सितंबर 1990 से ही कार्यशाला में लगातार पत्थर तराशने का काम चल रहा था. अब तक 65 फ़ीसदी काम भी पूरा हो चूका है. लेकिन दो महीने पहले मुख्य मूर्तिकार रजनीकांत की मौत हो गई. तभी से काम रुका हुआ है. तय किया गया है कि नए कारीगरों की नियुक्ति फैसले के बाद से की जाएगी. अब कार्यशाला में काम की शुरुआत राम जन्मभूमि न्यास की बैठक के बाद ही शुरू होगी.

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शरद शर्मा ने बताया कि एक ही मूर्तिकार कई महीनों से अकेले ही काम कर रहा था. अब फैसले के बाद न्यास की होने वाली बैठक में कारीगरों की संख्या बढ़ाने पर फैसला होगा. बता दें राम मंदिर निर्माण कार्यशाला का शिलान्यास 10 नवंबर 1989 में किया गया था।

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-Mradul tripathi

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