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महाराष्ट्रः उथलपुथल राजनीति, भाजपा-शिवसेना के बीच भय्यू महाराज का जिक्र क्यों?

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महाराष्ट्र (Maharashtra) की सियासत इन दिनों बेहद ही नाज़ुक दौर से गुज़र रही है। महाराष्ट्र के सत्ता सिंहासन पर कौन काबिज़ होगा इसका फैसला अभी तक भी नहीं हुआ है। चुनाव परिणाम आने के बाद सरकार बनने की कवायदें लगातार बन रही हैं और फिर शाम होते होते डूबते सूरज की तरह खत्म भी हो रही है। ऐसे में महाराष्ट्र की कमान कौन संभालेगा और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के सिपासालार के तौर पर कौन शपथ लेगा इसका फैसला अभी तक नहीं हो पाया है। ऐसे में महाराष्ट्र के राजनीति के जानकारों और राजनेताओं को एक शख्स की याद बहुत आ रही है। ये शख्स हैं राष्ट्रीय संत भय्यू महाराज (Bharyu maharaj) । राजनीति को जानने वालों का कहना है कि भय्यू महाराज यदि आज होते तो महाराष्ट्र की सियासत की पूरी बिसात अभी तक पूरी बिछ चुकी होती।

महाराष्ट्र में सरकार की उल्टी गिनती शुरु हो चुकी है। 9 नवंबर तक सभी नेताओं को अपना मुख्यमंत्री चुनना है नहीं तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हो जाएगा। ऐसे में शिवसेना के अड़ियल रवैये ने जहां भाजपा की मुसीबतें बढ़ा दी हैं, वहीं कांग्रेस और एनसीपी के दिमाग में क्या चल रहा है इसका कयान भी कोई नहीं लगा पाया है। ऐसे में अब लोग उन चेहरों को ढूंढने में जुट गए हैं, जो यदि आज होते तो महाराष्ट्र की राजनीति में अपनी अहम भूमिका निभा सकते थे। भय्यू महाराज का 12 जून 2018 को निधन हो गया था।

भय्यू महाराज के महाराष्ट्र के कई बड़े राजनेताओं से संबंध रहे थे। उनका बाला साहेब के घर मातो श्री में सीधा आना-जाना था। कई बार उनकी मुलाकात भी बाला साहेब ठाकरे से हुई थीं। वहीं उनके बेटे उद्धव ठाकरे भी भय्यू महाराज को काफी मानते थे। वहीं मनसे प्रमुख राज ठाकरे के संबंध भी भय्यू महाराज से काफी अच्छे थे। वे कई बार भय्यू महाराज के कार्यक्रमों में भी शिरकत कर चुके थे। इधर, यदि भाजपा की बात की जाए तो भाजपा में भी कई बड़े नेताओं के भय्यू महाराज से उसी तरह के रिश्ते थे, जैसे शिवसेना में। यही कहानी राकपा और कांग्रेस के साथ भी थी। उन्हें शरद पंवार भी मानते थे, तो कांग्रेस के भी कई नेता उनके खास थे।

ऐसे में नितिन गडकरी या देवेंद्र फडणवीस के नाम पर यदि आज पेंज फंसा है, तो शिवसेना को मनाने में और भाजपा के साथ लाने में भय्यू महाराज की भूमिका हो सकती थी। जब अण्णा हज़ारे अपना अनशन तोड़ने को राज़ी नहीं थे, तब कांग्रेस ने भय्यू महाराज का ही सहारा लिया था। वहीं पीएम मोदी भी उन्हें अपने शपथ ग्रहण में आमंत्रित किया था। इसलिए आज महाराष्ट्र के नेताओं को भय्यू महाराज की कमी जरुर अखर रही होगी।

– राहुल कुमार तिवारी

 

 

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