गणतंत्र दिवस परेड से महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल की झांकी बाहर

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(Republic Day Parade) नए साल की शुरुआत हो चुकी है और देशवसियों ने बड़ी ही धूम-धाम के साथ स्वागत किया है नए साल यानी 2020 का। नए साल के साथ ही शुरू हुआ इंतजार 26 जनवरी का। जी हां 26 जनवरी जिस दिन हमारे देश का संविधान लागू हुआ, जिसे हम सभी गणतंत्र दिवस (Republic Day) यानी रिपब्लिक डे के रूप में मनाते हैं। गणतंत्र दिवस के मौके पर आयोजन होता है परेड का जिसे देखने के लिए देशवासी बड़े उत्सुक रहते हैं। दरअसल इस परेड में देश के सभी राज्य हिस्सा लेते हैं और दर्शाते हैं अपने यहां की कोई विशेष खासियत को, लेकिन मौजूदा समय में देश झेल रहा है विरोध CAA का, NRC का, ऐसे में इस परेड पर भी राजनीति शुरू हो गई है। इस बार की परेड में महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल की झांकी को स्थान नहीं दिया गया।

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कौन करता है प्रस्ताव को मंजूर

दरअसल परेड का हिस्सा बनने के लिए सभी राज्य सरकारें रक्षा मंत्रालय के पास अपना प्रस्ताव (Republic Day Parade)  भेजती हैं और बताती हैं कि वे इस बार किस थीम पर झांकी तैयार कर रही हैं। इसके बाद रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) सभी प्रस्तावों पर चर्चा करता है और उन्हें मंजूर या नामंजूर करता है। चूंकि इस बार रक्षा मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल के प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया और उसके बाद 2 जनवरी को महाराष्ट्र का प्रस्ताव भी ठुकरा दिया। इन दोनों राज्यों की झाकियों का प्रस्ताव ना-मंजूर कर दिए जाने के बाद केंद्र सरकार टीएमसी, शिवसेना और एनसीपी (Shiv Sena and NCP) के निशाने पर आ गयी है। अब केंद्र सरकार पर विपक्षी पार्टियां आरोप लगा रही हैं कि केंद्र सरकार उन राज्यों की झाकियों को निशाना बना रही है जहां गैर-बीजेपी सरकारें हैं।

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(Republic Day Parade) इस मामले केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले (Union Minister Ramdas Athawale) ने एक बयान दिया और कहा कि वे महाराष्ट्र की झांकी का मुद्दा केंद्र सरकार के सामने जरूर उठाएंगे। रामदास अठावले यह बात एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही। इस दौरान उन्होंने कहा -अगर झांकी को इसलिए ख़ारिज़ किया गया है कि महाराष्ट्र में शिवसेना और पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार है, तो मैं ख़ुद इस मामले को देखूंगा।

वहीं रक्षा मंत्रालय ने इस आरोप को सिरे से नकार दिया है और एक बयान(Republic Day Parade)  भी जारी किया है। रक्षा मंत्रालय ने अपने बयान में झाकियों के प्रस्ताव को खारिज करने का कारण बताया। मंत्रालय ने कहा कि चूंकि कार्यक्रम में यानी कि परेड में समय का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है और इसी वजह से सीमित झाकियों को ही शामिल किया जा सकता है। रक्षा मंत्रालय ने यह भी बताया कि उन्होंने सिर्फ गैर-भाजपा राज्यों की झाकियों के प्रस्ताव को खारिज नहीं किया है बल्कि इस सूची में उत्तराखंड, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश का प्रस्ताव भी शामिल हैं जिन्हे नामंजूर किया गया है। मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल के बारे में कहा कि उसकी झांकी 2019 की परेड में शामिल की गई थी।

कितने प्रस्ताव आए

(Republic Day Parade)  रक्षा मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि देशभर के तमाम राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने उनके पास कुल 56 प्रस्ताव भेजे थे। कई राज्य ऐसे थे जिन्होंने एक से ज्यादा प्रस्ताव मंत्रालय के पास पहुंचाए थे। अब मंत्रालय को इनमें से बेहतर प्रस्तावों को चुनना था जो तय समय सीमा के अनुसार हों इसलिए 56 प्रस्तावों में से केवल 22 प्रस्तावों को ही स्वीकृति मिली। जो 22 प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय द्वारा चुने गए हैं उनमें राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों के केवल 16 प्रस्ताव ही हैं, बाकी बचे 6 प्रस्ताव अलग-अलग विभागों और मंत्रालयों के हैं। मंत्रालय को मिले 56 प्रस्तावों में से बेहतर झाकियों के प्रस्ताव को चुनने के लिए 5 बार बैठक आयोजित की गई और फिर इन प्रस्तावों का चुनाव हो सका।

(Republic Day Parade)  जिन राज्यों के प्रस्ताव को मंत्रालय ने नामंजूर किया उनमें महाराष्ट्र, बंगाल, केरल, दिल्ली, बिहार, हरियाणा, उत्तराखंड, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश शामिल हैं। इन 9 राज्यों में से 4 राज्यों में ग़ैर-बीजेपी सरकार है, जबकि बिहार और हरियाणा में गठबंधन की सरकार है और उसमें भाजपा शामिल है। बाकी बचे उत्तराखंड, त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश में भाजपा की सरकार है।

(Republic Day Parade)  महाराष्ट्र्र की तरफ से 4 प्रस्ताव भेजे गए थे जिनमें एक था महाराष्ट्र में थियेटर के 175 सालों का सफर, दूसरा था नौसैनिक बेड़े की 350वीं वर्षगांठ जिसे शुरू किया था मराठा शासक कान्होजी अंगरे ने। तीसरा प्रस्ताव था पारंपरिक वेशभूषा का और आखिरी था ‘गीत रामायण’ का। महाराष्ट्र के इन चारों प्रस्तावों को खारिज कर दिया गया। वहीं पश्चिम बंगाल ने जो प्रस्ताव भेजा था वह आधारित था ममता बनर्जी सरकार द्वारा छात्राओं के लिए शुरू की गई एक स्कीम ‘कन्याश्री योजना’ पर। ममता बनर्जी सरकार की यह योजना आर्थिक तौर पर पिछड़े परिवारों के लिए शुरू की गई है ताकि वे अपनी बच्चियों को शिक्षित कर सकें और उनकी शादी बालिग होने पर ही करें।

अब प्रस्ताव मंजूर नहीं हुआ तो शिवसेना के नेता संजय राउत ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए और उस पर आरोप लगाते हुए कहा, “महाराष्ट्र को ज़्यादातर बार अपनी झांकी के लिए अवॉर्ड मिले हैं। इस बार ऐसा क्या हुआ कि महाराष्ट्र और बंगाल को शामिल नहीं किया गया है? दोनों ही राज्यों में BJP की सरकार नहीं है। क्या यही कारण है?”

NCP सांसद सुप्रिया सुले ने भी इस पर केंद्र सरकार (Republic Day Parade) को घेरा है और कहा, “केंद्र सरकार पक्षपाती तरीके से बर्ताव कर रही है। जिन राज्यों में विपक्षी पार्टियों की सरकारें हैं, उनके साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है।” बंगाल और केंद्र सरकार के बीच की लड़ाई तो पूरे देश को पता है। दोनों के बीच 36 का आंकड़ा है। केंद्र सकरार कोई भी नियम कानून बनाती है तो पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार उसका सबसे पहले विरोध करती है। ताजा उदाहरण सभी के सामने है कि केंद्र सरकार द्वारा नागरिकता संशोधन कानून पूरे देश में लागू किया गया लेकिन ममता बनर्जी CAA और NRC का विरोध कर रही हैं।

(Republic Day Parade)  अब इसी को TMC के नेता ने झाकियों के प्रस्ताव को नामंजूर किए जाने का कारण बताया है। तृणमूल कांग्रेस के नेता मदन मित्रा ने कहा, “यह बंगाल के लिए नया नहीं है। दिल्ली को बंगाल से डर लगता है। वे दिल्ली में बंगाल की झांकी रद्द कर सकते हैं, बंगाल में NRC और CAA को बंगाल रद्द कर देगा।” मतलब इस बार 26 जनवरी के मौके पर होने वाली परेड में केवल 22 झाकियां ही देखने को मिलेंगी।

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