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आज से ठीक 22  दिन पहले यानी 5 जून को देश और दुनिया में विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment day) मनाया गया, लेकिन तारीखों की कैद में मुद्दों की अहमियत बस एक दिन तक ही रहती है। विकास की दौड़ में भारत एक ऐसा देश बनते जा रहा है, जिसके लिए दुनिया में विकासशील देशों (developed nations) की श्रेणी में आगे निकलना ज़्यादा मायने रखता है। हो सकता है आप इस बात से इत्तेफाक ना  रखते हों, लेकिन विकास के नाम पर प्रकृति से होने वाली बर्बरता (54K Mangrove Tress Cut Due To Metro Train Project) ही कहीं न कहीं बर्बादी का कारण बन रही है।

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एक ख़बर के मुताबिक, मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर  (Mumbai-Ahemadabad Rail Corridor) यानी बुलेट ट्रेन (Bullet train) परियोजना के चलते महाराष्ट्र में 13.36 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले करीब 54,000 मैंग्रोव पेड़ काटे जाएंगे (54K Mangrove Tress Cut Due To Metro Train Project)। राज्य सरकार द्वारा इसकी पुष्टि भी की जा चुकी है। हालांकि इस परियोजना के तहत काटे जाने वाले 54,000 मैन्ग्रोव पेड़ो (Mangrove Trees) पर राज्य के परिवहन मंत्री दिवाकर रावते ने यह आश्वासन भी दिया है कि इस परियोजना से पर्यावरण को न्यूनतम नुकसान (minimum loss to environment) होगा। परिवहन मंत्री दिवाकर ने यह भी कहा कि काटे गए हर 1 पेड़ के बदले 5 पेड़ लगाए जाएंगे।

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आपको यह जानना भी बहुत ज़रूरी है कि इस परियोजना के तहत काटे जाने वाले 54000 मैन्ग्रोव पेड़ Indian ecosystem के लिए क्यों ज़रूरी हैं। भारत में 4,482 वर्ग किमी का कुल मैंग्रोव कवर (mangrove cover)  है। मैन्ग्रोव के जंगल तटिय क्षेत्रों (seashore areas) को संरक्षण (protection) देते हैं और (54K Mangrove Tress Cut Due To Metro Train Project) देश में चक्रवात या सुनामी जैसी आपदाओं (disaster) को कम करते हैं। वैज्ञानिक शोध से यह भी पता चला है कि मैंग्रोव के जंगल (mangrove forest) बाकि जंगलों की तुलना में  ज़्यादा कार्बन डाइऑक्साइड  (carbondioxide) को स्टोर करते हैं। इसलिए इन्हे Lungs of Environment भी कहा जाता है।

अब तक, मैन्ग्रोव प्रजाति (species) में से किसी को भी International Union for Conservation of Nature की रेड लिस्ट (Red List)  में शामिल नहीं किया गया है, लेकिन शहरीकरण (urbanization), औद्योगिकीकरण (industrialization)  घरेलू सीवेज (domestic sewage) और pesticides (54K Mangrove Tress Cut Due To Metro Train Project) के कारण मैंग्रोव ख़त्म हो रहे हैं। अब तक भारत में लगभग 35,000 हेक्टेयर मैंग्रोव ख़त्म हो चुके हैं, ज़रूरत है पर्यावरण दिवस को तारीखों की कैद से आज़ाद कर हर दिन प्रकृति की अहमियत को समझने की।

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