अब चुनाव लड़ने से पहले नेताओं को क्रिमिनल रिकॉर्ड भी बताना होगा: सुप्रीम कोर्ट

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हमारे देश में हर मुकाम के लिए एक योग्यता तय कि गई है। (Check Candidate’s Criminal Record) जैसे यदि आपको किसी नौकरी के लिए आवेदन करना है तो आपके पास उस नौकरी के अनुसार शैक्षणिक योग्यता होनी चाहिए। यदि आपको नौकरी में पदोन्नति प्राप्त करना है तो अआप्के पास एक तय समय तक अनुभव होना चाहिए। यदि आपको सरकारी सुविधाओं का लाभ लेना है तो उसके लिए भी नियम और शर्ते है। लेकिन इन सब के विपरीत हमारे देश में उनके लिए कोई योग्यता या शर्ते नहीं है जो पूरे देश को चलाते है। जी हां हम बात कर रहे है हमारे देश के नेताओं की जिनको चुनाव लड़ने के लिए किसी योग्यता कि जरूरत नहीं अनपढ़ है. तो भी चुनाव (Check Candidate’s Criminal Record)  लड़ा जा सकता है , अपराधी है तब भी चुनाव लड़ा जा सकता है। और आपको ये सुनकर आश्चर्य होगा कि इस प्रकार के नेताओ के आदेश का पालन दिन रात पढ़कर अपनी मेहनत और योग्यता के आधार पर बने कलेक्टर और कमिश्नर को भी करना पड़ता है.

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लेकिन हाल ही में सुप्रीम कोर्ट (Check Candidate’s Criminal Record) ने इस मामले में थोड़ा पारदर्शिता लाने कि कोशिश कि है जिसके तहत सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)  ने राजनीति के अपराधीकरण में वृद्धि पर चिंता जाहिर करते हुए बृहस्पतिवार को सभी सियासी दलों को निर्देश दिया है कि वे चुनाव लड़ रहे अपने उम्मीदवारों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों का ब्यौरा अपनी वेबसाइट पर अपलोड करें। शीर्ष अदालत ने कहा कि सियासी दलों को वेबसाइट पर यह भी बताना होगा कि उन्होंने ऐसे उम्मीदवार क्यों चुनें जिनके खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं। न्यायालय ने एक अवमानना याचिका पर यह आदेश पारित किया। उस याचिका में राजनीति के अपराधीकरण का मुद्दा उठाते हुए दावा किया गया था कि सितंबर 2018 में आए शीर्ष अदालत (Check Candidate’s Criminal Record)  के निर्देश का पालन नहीं किया जा रहा है जिसमें सियासी दलों से अपने उम्मीदवारों के आपराधिक रिकॉर्ड का खुलासा करने को कहा गया था।

न्यायमूर्ति रोहिन्टन फली नरीमन (Justice Rohinton Fali Nariman) की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि सियासी दल उम्मीदवारों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की विस्तृत जानकारी फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, क्षेत्रीय भाषा के एक अखबार और एक राष्ट्रीय अखबार में प्रकाशित करवाएं।

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न्यायालय ने कहा कि सियासी दलों को ऐसे उम्मीदवार को चुनने के 72 घंटे के भीतर चुनाव (Check Candidate’s Criminal Record)  आयोग को अनुपालन रिपोर्ट देनी होगी जिसके खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं। साथ ही न्यायालय ने यह भी कहा कि जिन उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं उनके बारे में अगर राजनीतिक दल न्यायालय (Political Party Court) की व्यवस्था का पालन करने में असफल रहते हैं तो चुनाव आयोग इसे शीर्ष अदालत के संज्ञान में लाए। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि प्रतीत होता है कि बीते चार आम चुनाव से राजनीति में अपराधीकरण तेजी से बढ़ा है।

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट (Check Candidate’s Criminal Record)  ने 25 नवंबर को चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि वह आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों को चुनाव लड़ने से रोकने के लिए आदेश पारित करे, ताकि तीन महीने के अंदर राजनीतिक दलों को आपराधिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं को टिकट देने से रोका जा सके। तब सीजेआई एसए बोबडे और जस्टिस बीआर गवई की बेंच ने उपाध्याय की जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए यह आदेश दिया था। उपाध्याय की मांग थी कि पार्टियों को अपराधिक छवि वाले लोगों को चुनाव के टिकट देने से रोका जाए। साथ ही उम्मीदवार का आपराधिक रिकॉर्ड (Check Candidate’s Criminal Record)  अखबारों में प्रकाशित कराने का आदेश दिया जाए।

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)  में दाखिल एक शपथपत्र में बताया गया था कि देश में 1765 सांसद और विधायकों के खिलाफ 3045 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। यह सांसदों-विधायकों की कुल संख्या का 36 फीसदी है। संसद और विधानसभाओं में कानून निर्माताओं की संख्या 4896 है। जनप्रतिनिधित्व कानून के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार आपराधिक मामले में दो साल या इससे अधिक की सजा पाने वाले जनप्रतिनिधि और प्रत्याशी चुनाव लड़ने के अयोग्य हैं।

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-मृदुल त्रिपाठी

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