पिछले जन्म में कट्टर मुसलमान थे पीएम मोदी!

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क्या आप कभी सोच सकते हैं कि भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party)  के लोकप्रिय नेता, देश के प्रधानमंत्री और हिंदूवादी छाप वाले नरेन्‍द्र मोदी (Narendra Modi) पिछले जन्‍म में कट्टर मुस्लिम थे ?, लेकिन ऐसा दावा किया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi Previous Birth Secret)  पिछले जन्म में कट्टर मुस्लिम थे। ये दावा कोई और नहीं बल्कि न्यूज़ चैनल वाले कर रहे हैं। इंडिया टुडे ग्रुप के हिंदी चैनल ‘तेज़’ ने ऐसे ही दावे किये हैं।

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समाचार चैनल तेज ने दावा किया है कि पीएम मोदी पिछले जन्म में एक कट्टर मुसलमान (Narendra Modi Previous Birth Secret) थे। उन्होंने इस संबंध में एक पॅकेज बनाया है, जिसका नाम दिया है ‘कहानी मोदी के पिछले जन्म की!’ न्यूज़ चैनल इसमें पूरी तरह से अंधविश्वास और पिछले जन्म की कहानियों के बारे में बता रहा है। इसमें दावा किया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले जन्म में कट्टर मुसलमान थे और उनका नाम था सर सैय्यद अहमद खान था। सर सैय्यद अहमद खान जिन्‍होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की स्‍थापना की थी।

मोदी को कट्टर मुसलमान (Narendra Modi Previous Birth Secret) बताने वाले दावे अमेरिका में सानफ्रांसिस्को स्थित इंस्टिट्यूट फॉर द इंटिग्रेशन ऑफ सांइस इंट्यूशन एंड स्पीरिट (IISIS) ने किया है। अपनी रिपोर्ट में चैनल ने कहा कि पिछले जन्म में भी मोदी ने देश और समाज के लिए बहुत सारे काम किए थे। पिछले जन्म के सर सैयद अहमद और इस जन्म के नरेन्द्र मोदी की शक्ल-सूरत, दाढ़ी और आंखें ही एक जैसी नहीं हैं बल्कि उनके जीवन की घटनाएं भी चौंकाने वाली हद तक एक जैसी हैं। अमेरिकी संस्था ने पूरी दुनिया में 20 हजार लोगों के पुनर्जन्म पर रिसर्च किया है। इसके अलावा संस्था ने जानवरों के पुनर्जन्म पर भी रिसर्च किया है।

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पहले भी हो चुका है यह दावा (Narendra Modi Previous Birth Secret)

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जैसा दावा अभी ‘मोदी सरकार 2’ के बनने के बाद किया जा रहा है, वैसा ही पहली बार देश में मोदी सरकार बनने के बाद भी किया गया था। तब भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना सैय्यद अहमद से बताकर उन्हें कट्टर मुसलनाम बताया गया था। मोदी इस जन्म में अभूतपूर्व ढंग से पूरे भारत को अपने पक्ष में करने में कामयाब हुए और अगर पूर्व जन्म शोधकर्ताओं का दावा सही माना जाए तो मुसलमानों में एकता की अलख जगाकर और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की स्थापना करके उन्होंने पिछले जन्म में भी कुछ ऐसा ही काम किया था। इसीलिए ऐसी तुलना की जा रही है।

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