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जानिए लता जी की जिंदगी की ख़ास बातें

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स्वर कोकिला लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) की तबियत बिगड़ जाने की वजह से उन्हें अस्पताल में दाखिल करना पड़ा। हालांकि अब उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है और उनकी हालत में धीरे-धीरे सुधार भी हो रहा है। जैसे ही लता मंगेशकर की हालत नाजुक होने और उन्हें ICU में दाखिल किए जाने की खबर मीडिया जगत में आईं वैसे ही पूरा देश उनके जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना करने लगा। लता जी ने सिनेमा जगत को कई सदाबहार नगमे दिए हैं। 85 वर्षीय लता जी को अभी तक कई अवार्ड्स प्राप्त हो चुके हैं। इतना ही नहीं स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड में भी शामिल है। जब भी कहीं गीत, संगीत, गायन और आवाज की जादूगरी की चर्चा की जाती है तो हर किसी के होठों पर सहज और बरबस ही स्वर साम्राज्ञी का नाम आ जाता है। चलिए जानते हैं माता सरस्वती की अवतार कही जाने वाली स्वर कोकिला लता मंगेशकर के जीवन के बारे में।

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मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में 28 सितंबर 1929 को जाने-माने गायक दीनानाथ मंगेशकर (Deenanath Mangeshkar) के घर लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) का जन्म हुआ। चूंकि वे एक प्रसिद्ध गायक के घर जन्मीं थीं इसलिए उनकी गायिकी की शिक्षा बचपन में ही प्रारंभ कर दी गई। लता दीदी की 13 वर्ष की आयु में ही उनके पिता ने उनका साथ छोड़ दिया। पिता की मृत्यु के बाद लता दीदी के कंधों पर घर की जिम्मेदारियां आ गईं। बता दें कि जिम्मेदारियों के बोझ तले दबी लता दीदी ने स्कूल का मुंह तक नहीं देखा लेकिन उन्हें न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी सहित अनेक विश्वविद्यालयों में मानक उपाधि से नवाजा गया है।

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साल 1942 में आई एक मराठी फिल्म कीती हसाल में उन्हें पहली बार गाने का मौका मिला। लेकिन अफ़सोस की बात रही कि इस गाने को फिल्म में शामिल नहीं किया गया। लेकिन लता दीदी (Lata Mangeshkar) के गायन की शुरुआत हो चुकी थी। उन्होंने सन 1942 से 1948 के बीच हिंदी व मराठी फिल्मों में काम किया। इन फिल्मों में पहेली मंगलागौर, मांझे बाल, गजाभाऊ, छिमुकला संसार, बडी मां, जीवन यात्रा, छत्रपति शिवाजी जैसी कई फिल्में शामिल थीं। इस दौरान उन्हें मुंबई में उस्ताद अमानत अली खान (Amanat Ali Khan) जैसे गुरु मिले जिन्होंने लता जी को संगीत प्रशिक्षण दिया। लेकिन सन 1947 में भारत का विभाजन हो गया और उस्ताद अमानत अली खान को पाकिस्तान जाना पड़ा। इसके बाद लता मंगेशकर ने रजब अली खा के भतीजे अमानत खा से शास्त्रीय संगीत (Indian classical music) का प्रशिक्षण लेना शुरू किया।

बाम्बे टाकीज में बनी फिल्म ‘मजबूर’ में लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) को पार्श्वगायक के तौर पर गाने का मौका मिला और इसी फिल्म से लता मंगेशकर की जिंदगी में नया मोड़ आया। लता दीदी की आवाज में फिल्म मजबूर का गाना “दिल मेरा तोडा, मुझे कही का न छोड़ा” बेहद लोकप्रिय हुआ। इसके बाद सन 1949 में फिल्म महल में लता मंगेशकर ने ‘आएगा आनेवाला’ गाना गया। यह गाना भी बेहद हिट हुआ। इसके बाद तो लता मंगेशकर की आवाज का जादू सभी पर चल गया। लता मंगेशकर की ख्याति लगातार बढ़ने लगी और उस समय के सभी प्रसिद्ध संगीतकारों ने उनके साथ काम किया। अनिल विश्वास, सलिल चौधरी, शंकर जयकिशन, एस.डी.बर्मन, आर.डी.बर्मन, नौशाद, मदनमोहन, सी. रामचंद्र जैसे प्रसिद्ध संगीतकारों ने भी उनकी सुरीली आवाज का लोहा माना। इसके बाद लता मंगेशकर ने आंखें बारह हाथ, दो बीघा जमीन, मदर इंडिया, मुगल-ए-आजम जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में सुपरहिट गाने गाए।

लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) की 7 दशक की स्वर यात्रा में उनकी आवाज का जादू ऐसा चला कि सिर्फ देश नहीं बल्कि विदेशों में भी लोग उनकी आवाज के आगे नतमस्तक हो गए। सन 1958 में आई फिल्म ‘मधुमती’ के एक गाने ‘आ जा रे परदेशी’ के लिए उन्हें पहला अवार्ड प्राप्त हुआ। सन 1962 में भारत और चीन के बीच हुए युद्ध में शहीद हुए जवानों के लिए जब लता मंगेशकर ने पंडित प्रदीप के लिखे अमर गीत ‘ऐ मेरे वतन के लोगों जरा आंख में भर लो पानी’ गाया तो तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू खुद रो पड़े थे। लता दीदी ने गणतंत्र दिवस के मौके पर इस गाने को गाया जहां पंडित नेहरू भी उपस्थित थे। बता दें कि लता दीदी की आवाज को फिल्म शहीद के निर्माता सशधर मुखर्जी ने यह कहकर रिजेक्ट कर दिया था कि उनकी आवाज बहुत पतली है और यह लोगों के दिलों को नहीं छू सकती। लेकिन आज वही आवाज देश नहीं बल्कि दुनिया में गूंज रही है। लता मंगेशकर ने अभी तक लगभग 30 से ज्यादा भाषाओं में 30 हजार से भी ज्यादा फ़िल्मी और गैर-फ़िल्मी गाने गाए हैं।

सन 1969 में लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) को पद्म भूषण और लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से नवाजा गया। सन 1989 में दादा साहेब फाल्के पुरस्कार, 1997 में राजीव गांधी पुरस्कार, 1999 में पद्मविभूषण के अलावा उन्हें अब तक कई राष्ट्रीय व फिल्म फेयर अवॉर्ड दिए जा चुके हैं। साल 2001 में लता मंगेशकर को भारत रत्न पुरूस्कार से सम्मानित किया गया था। इतना ही नहीं सन 1974 में लता जी ने दुनिया भर में सबसे अधिक गीत गाए। दुनिया में सबसे ज्यादा गीत गाने की वजह से उनका नाम ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड’ (Guinness World Records) में दर्ज हो गया। लता मंगेशकर ने अंग्रेजी, मणिपुरी, मलयालम, हिंदी, सिंधी, तमिल, तेलुगू, उर्दू, मराठी, नेपाली, असमिया, बांग्ला, ब्रजभाषा, डोगरी, भोजपुरी, कोंकणी, कन्नड़, मगधी, मैथिली जैसी अनेकों भाषाओं में गाने गाए हैं। लता मंगेशकर बेहद सौम्य, सादगीप्रिय एवं सरल स्वभाव की हैं। इतनी प्रसिद्धि, कीर्ति, शोहरत और ऐश्वर्य के बाद भी लेश मात्र अहंकार उनमें कभी नहीं देखा। उनको न तो आभूषणों का शौक है, न ही पहनने-ओढ़ने का। न वे खान-पान की शौकीन हैं। लता मंगेशकर अध्यात्म पर बेहद खास ध्यान देती हैं और उनकी सबसे ख़ास बात है वह है शास्त्रीय संगीत सीखने की इच्छा। लता दीदी आज भी शास्त्रीय संगीत (Indian classical music) सीख रही हैं। लता मंगेशकर केवल भारत नहीं बल्कि दुनिया के संगीत का गौरव एवं पहचान है।

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Prabhat Jain

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