CAA के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वाला ये बना पहला राज्य

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तिरुवनंतपुरम (Thiruvananthapuram): देशभर में नागरिकता संशोधन अधिनियम (Kerala Against CAA) को लेकर घमासान मचा हुआ है. बीते कल विपक्षी दलों ने इसको लेकर सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) के आवास पर एक बैठक का भी आयोजन किया था. इस बीच पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली केरल सरकार ने नागरिकता कानून के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया है. केरल सरकार का कहना है कि संशोधित कानून भारतीय संविधान द्वारा दिए गए समानता के अधिकार के प्रावधानों के खिलाफ है. केरल सरकार ने CAA के खिलाफ संविधान के आर्टिकल 131 के तहत सूट दाखिल किया है. याचिका में CAA को भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक बताया गया है. संविधान का आर्टिकल 131 भारत सरकार और किसी भी राज्य के बीच किसी भी विवाद में सर्वोच्च न्यायालय को मूल अधिकार क्षेत्र देता है.

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केरल सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court by Kerala Government)  का रुख करने के साथ ही केरल नागरिकता कानून (Kerala Against CAA) को न्यायालय ले जाने वाला पहला राज्य बन चुका है. अब तक सीएए (CAA) पर कई राज्यों ने आपत्तियां दर्ज कराई हैं लेकिन अब तक किसी ने कोर्ट का रुख नहीं किया है. केरल की एलडीएफ (LDF) सरकार ने नागरिकता अधिनियम और पासपोर्ट अधिनियम और विदेश अधिनियम अधिनियम को भी चुनौती दी है. केरल सरकार ने अपनी याचिका में कहा है कि सीएए को संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 25 के उल्लंघन के रुप में घोषित करना चाहिए. बता दें कि अनुच्छेद 14, 21 और 25 भारत में धर्मनिरपेक्षता की बात करते हैं. अनुच्छेद 14 सभी के लिए समानता के अधिकार का वादा करता है जबकि अनुच्छेद 21 कहता है कि “कोई भी व्यक्ति कानून द्वारा स्थापित एक प्रक्रिया को छोड़कर अपने जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित नहीं होगा” और अनुच्छेद 25 कहता है “सभी व्यक्ति समान रूप से विवेक की स्वतंत्रता के हकदार हैं”.

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(Kerala Against CAA) आपको बता दें की CAA के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पेश करते हुए सीएम पिनराई विजयन (CM Pinarai Vijayan) ने कहा था, ‘केरल में धर्मनिरपेक्षता, यूनानियों (The Greeks) , रोमन (Roman), अरबों का एक लंबा इतिहास है, हर कोई हमारी भूमि पर पहुंच गया. ईसाई और मुसलमान शुरुआत में केरल (Kerala) पहुंचे. हमारी परंपरा समावेशी है. मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि केरल में कोई डिटेंशन सेंटर नहीं बनेगा.’ विधानसभा में कांग्रेस, सीपीआई (एम) ने पिनराई द्वारा पेश किये गए प्रस्ताव का समर्थन किया.

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-Mradul tripathi

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