Kerala Nun Rape Case : पीड़िता का साथ देने वाली नन का चर्च ने किया ये हाल

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देश में छेड़छाड़ और दुष्कर्म जैसे मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। इन मामलों में न्याय प्रक्रिया लंबी होने के कारण आरोपियों के इरादे और बुलंद हो जाते हैं। हालात यह हो गए हैं कि दुष्कर्म पीड़िता का साथ देने वालों को भी आरोपियों के नापाक इरादों का शिकार बनना पड़ता है। केरल में नन (Kerala Nun Rape Case) के साथ हुए दुष्कर्म के मामले में चर्च के अधिकारी पीड़िता का साथ देने के बजाय आरोपी का साथ (Kerala Church Dismisses Nun For Protesting Against Rape Accused) दे रहे हैं। इतना ही नहीं पीड़िता का साथ देने वाली सिस्टर लूसी (Sister lucy) को फ्रैंसिशन क्लैरिस्ट कॉन्ग्रिगेशन से बाहर कर दिया गया है।

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केरल में रेप के आरोपी बिशप फ्रैंको मुलक्कल के खिलाफ मोर्चा खोलने वाली सिस्टर लूसी को फ्रैंसिशन के खिलाफ चर्च लगातार फैसला ले रही है। पहले उन्हें चेतावनी दी गई थी और अब उन्हें चर्च से बाहर कर दिया गया है। सिस्टर लूसी फ्रैंसिशन क्लैरिस्ट कॉन्ग्रिगेशन में ही काम करने वाली एक नन है, जिसे अनुशासनात्मक कार्रवाई के नाम पर निकाला गया है। लूसी कलाप्पुरा उन पांच ननों में शामिल थीं, जिन्होंने पीड़ित नन के समर्थन में कोच्ची उच्च न्यायालय के बाहर प्रदर्शन किया था। उन्हें 10 दिन के अंदर अपने कॉन्वेंट को छोड़ने का आदेश दिया गया है। लूसी फिलहाल केरल के वायनाड में द्वारका सैकरेड हार्ट स्कूल में कार्यरत हैं।

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सिस्टर को निकालने (Kerala Church Dismisses Nun For Protesting Against Rape Accused) के लिए जारी किए गए आदेश में लिखा है कि उन्होंने चर्च के विरुद्ध जाकर फ्रांको मुलक्कल का विरोध किया। बिना अनुमति के चैनलों की बहस में हिस्सा लिया। बिना चर्च की अनुमति के एक गैर मिशनरी अखबार में लिखा और एक कविताओं की किताब भी लिखी और वे लगातार सोशल मीडिया पर सक्रिय है। साथ ही उन पर ननों की पोशाक ना पहनने और समय पर ना आने के भी आरोप लगाए गए। वहीं सिस्टर का कहना है कि उसे रेप पीड़िता का साथ और फ्रांको मुलक्कल का विरोध करने की सज़ा दी जा रही है।

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