कैलाश विजयवर्गीय, लालवानी बीजेपी से बाहर!

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भाजपा के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya) और पार्टी के कई बड़े नेताओं को पार्टी द्वारा बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है! कैलाश विजयवर्गीय के विधायक पुत्र आकाश विजयवर्गीय (Akash Vijayvargiya) के कृत्य की सज़ा अब इंदौर भाजपा के बड़े नेताओं को मिलने वाली है, जो उनके समर्थन में खड़े थे और जिन्होंने आकाश को बच्चा बताकर बचाने का प्रयास किया था। इंदौर के दो प्रमुख अखबारों ( दैनिक भास्कर और पत्रिका ) द्वारा इस बात का दावा किया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi ) की बात माने तो इंदौर के कई बड़े नेता घर बैठ जाएंगे, जिनमें कैलाश विजयवर्गीय, शंकर लालवानी (Kailash Vijayvargiya Shankar Lalwani Out From BJP ) , रमेश मेंदोला (Ramesh Mendola) जैसे कई नाम शामिल हैं।

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इंदौर नगर निगम के कर्मचारी की बल्ले से पिटाई करने वाले विधायक आकाश विजयवर्गीय के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र का गुस्सा (Kailash Vijayvargiya Shankar Lalwani Out From BJP ) पार्टी के कई नेता, मंत्री और कार्यकर्ताओं पर फूटा। संसदीय दल की बैठक में मंगलवार को आखिर पीएम ने कह ही दिया, “बेटा किसी का भी हो, ऐसा घंमड-दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं होगा। ऐसे लोगों को बाहर कर देना चाहिए। ” पीएम का बस इतना कहना ही हुआ कि बल्लाकांड के बाद कोई कार्रवाई नहीं करने वाली भाजपा एक्शन में आ गई और तुरंत आकाश के नाम कारण बताओ नोटिस रसीद कर दिया। इसके साथ ही बल्लाधारी आकाश के समर्थन में खड़े हुए नेता भी चपेट में आ गए। नेताओं पर गाज भी ऐसी गिरी की अब उनकी कुर्सी तक खतरे में आ गई।

पत्रिका पेपर ने अपने मुख्य पृष्ठ पर प्रमुखता से यह खबर छपी है कि जल्द ही इंदौर भाजपा के कई बड़े नेता घर बैठने वाले हैं, यानी उन्हें पार्टी अब बाहर का रास्ता दिखाने वाली है। पेपर में यह साफ़ किया है कि यदि विधायक आकाश विजयवर्गीय की अफसर के साथ मारपीट के मामले में नाराज प्रधानमंत्री की बात मान लेते हैं तो इंदौर में भाजपा के कई सांसद, विधायक और संगठन के कई बड़े पदाधिकारी घर बैठ जाएंगे। बल्लाकाण्ड के बाद विधायक आकाश का समर्थन करने तथा उनका स्वागत करने वाले नेताओं पर भी कार्रवाई की जा सकती है।

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पत्रिका और दैनिक भास्कर पेपर के अनुसार, भाजपा इन्हे दिखा सकती है बाहर का रास्ता (Kailash Vijayvargiya Shankar Lalwani Out From BJP ) –

कैलाश विजयवर्गीय – तुम्हारी हैसियत क्या है

भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने अपने विधायक पुत्र आकाश के कृत्य के बाद मीडिया को औकात दिखाई थी। इसके बाद से वे मीडिया से बचाव कर रहे हैं। आकाश के जेल से छूटने के बाद भी उन्होंने बेटे का समर्थन किया और कहा था कि आकाश अभी राजनीति में कच्चा है। निगम भी उतना ही जिम्मेदार है। बारिश में ऐसी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।

शंकर लालवानी – तानाशाही पर उतरे निगम के अफसर

इंदौर के भाजपा सांसद शंकर लालवानी शुरू से आकाश की हरकत पर पर्दा डालते रहे। बल्लाकाण्ड के बाद से ही वे आकाश के रक्षक बन सभी को जवाब देते रहे। पहले उन्होंने गिरफ्तारी का विरोध किया, फिर विधायक से मिलने जेल पहुंचे और हर मुमकिन कोशिश करते रहे कि आकाश जल्द जेल से बाहर निकले। आकाश की गिरफ्तारी के बाद उन्होंने कहा था कि विधायक आकाश के साथ प्रशासन का रवैया पक्षपात पूर्ण रहा है। निगम के अफसर तानाशाही पर उतर गए हैं।

महेंद्र हार्डिया – गरीबों के मसीहा आकाश

विधायक महेंद्र हार्डिया भी आकाश के बल्लाकाण्ड के बड़े समर्थक के रूप में खड़े थे। यहां तक की उन्होंने यह तक कह दिया था कि आकाश ने जो किया वह सही किया, कमर्चारी की पिटाई गरीबों के पक्ष में की।

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गोपी नेमा – हम आंदोलन करेंगे

इस घटना के बाद नगर अध्यक्ष गोपी नेमा ने कहा था कि प्रशासन और अधिकारी कांग्रेस प्रतिनिधि के रूप में कार्य का रहे हैं। अब हम आंदोलन करेंगे। वहीं पीएम का बयान आने के बाद कह रहे हैं कि संगठन पार्टी के निर्देशों का पालन करेगा।

सुदर्शन गुप्ता – फिर बनेगी हमारी सरकार

विधायक आकाश जब जेल गए थे तब पूर्व विधायक सुदर्शन गुप्ता ने कहा कि अफसर तानाशाही पर उतर आये हैं।

चंदू शिंदे – सबसे पहले किया स्वागत

विधायक आकाश विजयवर्गीय जैसे ही जेल से बाहर आये थे तब चंदू शिंदे ही ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने सबसे पहले विधायक को माला पहनाई थी। वे आकाश से मिलने दो बार जेल गए थे और जेल से बाहर आकर विधायक आकाश ने उनके पैर भी छुए।

जीतू जिराती – हर समय दिया साथ

प्रदेश उपाध्यक्ष और पूर्व विधायक जीतू जिराती शुरू से ही आकाश के साथ थे। उन्होंने भी पूरी तरह से विधायक का साथ दिया था।

इन नेताओं के बयान और उनके व्यवहार को देखते हुए प्रधानमंत्री ने सभी के खिलाफ कार्रवाई करने का फरमान सुना दिया और विधायक आकाश के खिलाफ नोटिस भी जारी कर दिया, लेकिन दैनिक भास्कर में छपी खबर के अनुसार, मोदी सरकार नोटिस देकर पटाक्षेप करने की तैयारी कर रही है। जैसा की सभी जानते हैं पहले साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को भी कारण बताओ नोटिस भेजा गया था, लेकिन उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी। ऐसा ही शायद अब आकाश के साथ भी होने वाला है। फिलहाल पार्टी की और से कोई बड़ा फैसला विधायक के खिलाफ नहीं लिया गया है, लेकिन अब सभी को इस बात का इन्तजार है कि क्या आकाश से विधायकी छीनी जा सकती है ? क्या कई मंत्री, नेता और कार्यकर्ताओं को भी पार्टी बाहर का रास्ता दिखा सकती है ? इन सवालों के जवाब तो तभी सामने आएंगे जब पार्टी की ओर से कोई फैसला लिया जाएगा।

 

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