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अयोध्या विवाद सबसे कठिन मामला था: जस्टिस बोबडे

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सुप्रीम कोर्ट ने आयोध्या विवाद पर अब तक का सबसे बड़ा ऐतिहासिक फैंसला सुनाया है.सीजेआई रंजन गोगोई (Ranjan gogoi) की अध्यक्षता में पांच जजों की बेंच ने विवादित स्थल पर राममंदिर बनाने और मस्जिद के लिए 5 एकड़ जमीन देने का फैंसला सुनाया है. अयोध्या विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से लिए गए फैसले को जस्टिस शरद अरविंद बोबडे (Sharad Arvind Bobde) ने ऐतिहासिक बताया है.

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जानकारी के अनुसार चीफ जस्टिस शरद अरविंद बोबडे (Sharad Arvind Bobde) ने कहा कि जब अयोध्या पर फैसला देने का समय आया तो हम सभी जजों की सहमति थी कि यह एक फैसला होना चाहिए. उन्होंने कहा कि हम सभी अयोध्या के फैसले को लेकर एकमत थे. जस्टिस बोबडे ने कहा की यह केस सबसे कठिन मामलों में से एक था. अयोध्या पर फैसला देने से पहले हम कानून व्यवस्था को लेकर थोड़ा चिंतित थे. फैसला सुनाने से पहले मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने यूपी के मुख्य सचिव और डीजीपी से मुलाकात की थी। हम संतुष्ट हैं कि हमने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया. जस्टिस बोबडे ने कहा कि इस फैसले के बाद मैं एक ही संदेश देना चाहता हूं कि कई सालों से चला आ रहा यह विवाद अब खत्म हो गया है.

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आपको बता दे की सीजेआई रंजन गोगोई ने आयोध्या विवाद (Ayodhya Dispute) पर विवादित स्थल पर राममंदिर बनाने का आदेश दिया है जिसमे केंद्र को आदेश दिया गया है की वह 3 महीने के अंदर ट्रस्ट बनाकर मंदिर का निर्माण शुरू करे और साथ ही मस्जिद के लिए 5 एकड़ जमीन देने के लिए कहा था। वहीं 2.77 एकड़ विवादित जमीन पर सरकार का अधिकार रहेगा. गौरतलब है की इस फैंसले का स्वागत काफी हद तक मुस्लिम समाज के द्वारा भी किया गया है। देश की जनता ने सर्वोच्च अदालत के इस फैंसले का सम्मान किया है. और स्वीकार किया है। फैंसले के बाद  कुछ हद तक विवादों की स्थि0ति निर्मित होने की आशंका थी लेकिन दोनों समुदाय ने अमन कायम रख के एकता की मिसाल कायम की है।

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-Mradul tripathi

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