घाटी से बुरहान गैंग का किया सेना ने खात्‍मा

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जम्‍मू-कश्‍मीर (Jammu and Kashmir) से एक अच्छी खबर सामने आ रही है | दरअसल, यहाँ के शोपियां में शुक्रवार को सुरक्षाबलों को एक बड़ी सफलता हाथ लगी। सेना, सीआरपीएफ और जम्‍मू-कश्‍मीर पुलिस के संयुक्‍त अभियान में आतंकवादियों के पोस्‍टर बॉय बुरहान वानी के ब्रिगेड कमांडर लतीफ अहमद डार उर्फ लतीफ टाइगर को मार गिराया है । लतीफ के साथ आतंकी संगठन हिज्‍बुल मुजाहिदीन के दो और आतंकवादी मारे गए हैं। लतीफ की मौत के साथ ही घाटी से बुरहान गैंग का खात्‍मा (Burhan gang kills by army) हो गया है।

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इन आतंकवादियों के पास से भारी मात्रा में हथियार बरामद हुआ है। लतीफ पुलवामा का रहने वाला है, वहीं तारिक तथा शरीक अहमद नेंगरु शोपियां के रहने वाले हैं। लतीफ वर्ष 2014 से आतंकी गतिविधियों में लिप्‍त था।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, इमाम साहिब गांव में शुक्रवार सुबह सुरक्षा बलों ने गुप्‍त सूचना के आधार पर इलाके को घेर लिया। इसी दौरान वहां छिपे हिज्‍बुल आतंकवादियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। दोनों तरफ से गोलीबारी में हिज्‍बुल के तीन आतंकी ढेर हो गए। मारे गए गए आतंकवादियों की पहचान हिज्‍बुल कमांडर लतीफ अहमद डार उर्फ लतीफ टाइगर, तारिक मौलवी और शरिक अहमद नेंगरु के रूप में हुई है।

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बुरहान गैंग के 11 आतंकी 

बुरहान वानी गैंग में शामिल 11 लोगों में से 10 लोग मारे गए हैं, जबकि एक अन्य तारिक पंडित ने सुरक्षा बलों के समक्ष सरेंडर कर दिया था। मारे गए आतंकियों के नाम हैं- सद्दाम पैडर, बुरहान वानी, आदिल खांडे, नसीर पंडित, अफ्फाक बट, सब्जार बट, अनीस, अश्फाक डार, वसीम मल्ला और वसीम शाह। इनके अलावा लतीफ भी इसी गैंग का सदस्‍य था।

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हिज्‍बुल के मोस्ट वॉन्टेड आतंकी रहे बुरहान वानी को लेकर घाटी में दो नजरिए हैं। सोशल मीडिया पर घाटी के युवाओं में काफी फेमस बुरहान वानी कौन था, तो दो जवाब मिलते थे। कुछ महीनों पहले तक स्थानीय लोगों से पूछने पर वे उसे ‘भारतीय एजेंट’ बुलाते थे। जबकि सुरक्षा एजेंसियों के लिए वह मीडिया का बनाया हुआ कागजी शेर था।

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बता दें कि वर्ष 2016 में हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर और आतंक के नए पोस्टर ब्वॉय बने बुरहान वानी की 10 अन्य आतंकियों के साथ तस्वीर सामने आने के बाद सनसनी फैल गई थी।  बाद में सुरक्षा बलों ने 8 जुलाई, 2016 को एक मुठभेड़ में बुरहान वानी को मार गिराया था। बुरहान के मारे जाने के बाद घाटी में काफी तनाव फैल गया था। तब से लेकर अब तक सैंकड़ों लोग इस हिंसा में मारे गए हैं|

रक्षा सूत्रों के मुताबिक जैश-ए-मोहम्मद पहले लश्कर-ए-तैयबा और हिज्बुल मुजाहिदीन के अंडर में काम करता था, लेकिन इस साल सुरक्षाबलों पर हुए लगभग सभी हमलों में जैश की भागीदारी रही है। पुलवामा जिला पाकिस्तान की सीमा से दूर है, इसलिए पाकिस्तान से आए आतंकवादियों का यहां पहुंचना बहुत चुनौतीपूर्ण काम है। जैश ने लोकल लड़कों की भर्ती शुरू की। उन्‍होंने बताया कि पाकिस्तान में बैठे आतंकवादी मसूद अजहर को 1994 में दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग से ही अरेस्ट किया गया था। हालांकि 1999 में प्लेन हाइजैक के बाद सरकार ने यात्रियों के बदले उसे छोड़ दिया था। इसके बाद ही जैश-ए-मोहम्मद का जन्म हुआ।

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