दिल्ली के जामिया में भड़की आग के लिए बीजेपी ज़िम्मेदार!

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जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी (Jamia Millia Protest On CAB) में 15 दिसंबर को हुई हिंसा की आग में पूरा देश जल रहा है। जामिया में नागरिक संशोधन कानून (Civil amendment act 2019)  का छात्रों ने हंगामा किया,  जिसके बाद आज देश के 14 से अधिक राज्यों की यूनिवर्सिटी भी प्रदर्शन कर रही है। दिल्ली में हुई छात्रों के साथ बर्बरता के लिए कौन जिम्मेदार हैं और दिल्ली में बसों में आग किसने लगाई ? इसे लेकर सोशल मीडिया पर कई नाम सामने आ रहे हैं। इनमें दिल्ली की केजरीवाल सरकार (Kejriwal government of Delhi) , केंद्र की भाजपा सरकार (BJP Government ) और दिल्ली पुलिस का नाम लिया जा रहा है। दिल्ली सरकार (Delhi Government ) का कहना है कि आगजनी बीजेपी ने करवाई और केंद्र सरकार के इशारों पर ही पुलिस ने बसों में आग लगाई।

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क्या है मामला ?

जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी (Jamia Millia Protest On CAB) में हिंसा के दौरान ही प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (Delhi Transport Corporation) कि चार बसों को भी आग के हवाले कर दिया था। अब सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो वायरल हो रहे हैं , जिसमें कुछ पुलिसवालों को हाथ में पीले रंग की कैन से कुछ डालते हुए देखा जा रहा है।  इस वीडियो को दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Delhi Deputy Chief Minister Manish Sisodia) ने ट्वीट और लिखा कि दिल्ली पुलिस के संरक्षण में आग लगाई जा रही है। इसके बाद चिन्मय बिस्वाल ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे क्लेम को खारिज किया, लेकिन पुलिस द्वारा आग लगाने वाला यह दावा सोशल मीडिया पर वायरल तो हो गया, लेकिन इसकी सच्चाई ज्यादा दिनों  तक नहीं छिप पाई ।

दिल्ली के जामिया में भड़की आग के लिए बीजेपी ज़िम्मेदारी!

क्या है सच्चाई ?

वीडियो (Jamia Millia Protest On CAB) में दिख रहा है कि एक व्यक्ति रसायनिक अग्निशामक यंत्र से आग बुझाने की कोशिश कर रहा है। उसके पास से एक व्यक्ति पीले रंग का कैन लेकर आता है।  इस पीली कैन को वह पुलिसकर्मी को दे देता है और पुलिसवाला कैन के पदार्थ को बस में फेंक देता है।  सच्चाई यह है कि जिसे पेट्रोल समझा जा रहा था दरअसल वह पानी था। बस के पीछे की सीट पर आग लगी हुई थी, जिसे बुझाने के लिए पुलिसवाले कैन में भरकर पानी लेकर गए, लेकिन उस पानी को पेट्रोल बताकर सोशल मीडिया पर वायरल किया गया। इसी के साथ सोशल मीडिया पर यह भी कहा जा रहा था कि जामिया में हुई हिंसा में शाकिर नाम के एक स्टूडेंट (Jamia student) की मौत हुई है, लेकिन यह भी बात गलत साबित हुई।

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            – Ranjita Pathare 

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