Oscar Awards 2019 : भारत की इस शॉर्ट फिल्म को मिला ऑस्कर

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दक्षिणी कैलिफोर्निया में पली-बढ़ी एक किशोर लड़की अपने पिता की सराहना करते हुए बताती हैं कि जब भी उन्हें मासिक धर्म होता था तो उसके पिता घर पर चॉकलेट लाते थे| उसने कभी नहीं समझा कि वह कितनी भाग्यशाली थी| एक दशक से भी अधिक समय के बाद जब उसने मासिक धर्म पर फिल्म बनाने के लिए भारत की यात्रा की, तब जाना कि यहां के युवा मासिक धर्म को बीमारी मानते हैं| वहीं बुजुर्ग महिलाओं को पीरियड ( Short Film Period End Of Sentence) के दौरान पूजा-पाठ नहीं करने देते हैं|    

उन्होंने भारत में फ़ैली इन्हीं भ्रांतियों को अपने कैमरे में कैप्चर किया ( Short Film Period End Of Sentence) और अब उनकी फिल्म ने अकादमी पुरस्कार ( ऑस्कर अवार्ड) हासिल किया है|

A photo from filming "Period. End of Sentence." (Courtesy of Sam Davis)

हम बात कर रहे हैं ईरानियन-अमेरिकन फिल्ममेकर रायका जेहताब्ची की, जिनकी फिल्म ‘पीरियड एंड ऑफ सेंटेंस’ ( Short Film Period End Of Sentence) को डॉक्यूमेंट्री शॉर्ट सब्जेक्ट ऑस्कर अवार्ड हासिल हुआ है| भारत में माहवारी से जुड़ी भ्रांतियों से जूझ रही एक महिला के जीवन पर आधारित यह फिल्म भारत में महिलाओं के मासिक धर्म से जुड़ी वर्जनाओं के खिलाफ और असल जिंदगी के ‘पैडमैन’ अरुणाचलम मुरुगनाथम के काम पर बात करती है।

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फिल्म की कार्यकारी निर्माता गुनीत मोंगा हैं और इसका सह-निर्माण मोंगा की सिखिया एंटरटेनमेंट कंपनी द्वारा किया गया है, जो ‘द लंच बॉक्स’ और ‘मसान’ जैसी फिल्मों का हिस्सा रह चुकी हैं ।

इसका निर्माण द पैड प्रोजेक्ट द्वारा किया गया है। द पैड प्रोजेक्ट एक संगठन है, जिसका निर्माण लॉस एंजेल्स के ऑकवुड स्कूल और उनकी शिक्षिका मेलिसा बर्टन द्वारा किया गया है।

A photo from filming, "Period. End of Sentence." (Courtesy of Melissa Berton)

सोमवार को ऑस्कर शॉर्टलिस्ट की घोषणा के बाद खुशी जताते हुए मोंगा ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट शेयर कर लिखा था , “शॉर्टलिस्ट में जगह बनाना बहुत गर्व और रोमांचक भरा रहा है। मैं इसकी निर्माण टीम का हिस्सा बनकर बहुत खुश हूं।”

अब फिल्म को ऑस्कर अवार्ड मिलने के बाद उनकी खुशी का ठिकाना नहीं है| इस श्रेणी की अन्य फिल्मों ‘ब्लैक शीप’, ‘एंड गेम’, ‘लाइफबोट’, ‘लॉस कमांडोज़’, ‘मॉय डेड डैड्स पॉर्नो टेप्स’, ‘अ नाइट एट द गार्डन्स’, ’63 बॉयकॉट’, ‘वुमन ऑफ द गुलेग’ व ‘ज़ियॉन’ को पछाड़ते हुए उन्होंने यह अवार्ड हासिल किया है।

क्या है कहानी ? ( Short Film Period End Of Sentence Story)

26 मिनट की फिल्म में भारत के हापुड़ की लड़कियों और महिलाओं की कहानी दिखाई गई है। कहानी गांव में पैड मशीन की स्थापना के अनुभवों को दिखाती है। यह फिल्म अरुणाचलम मुरुगनाथम के उस मशीन आविष्कार को भी दिखाती है, जो कम दाम में आसानी से सैनिटरी नैपकिन बनाती है।

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अंकुर उपाध्याय

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