दुश्मन पाकिस्तान के लोगों को हिन्दुस्तान में पनाह क्यों ?

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भारत (India) और पाकिस्तान (Pakistan) के बीच सालों से विवाद है। एक दुसरे को अपना दुश्मन मानने वाले दोनों देशों में यदि गलती से भी दुसरे देश का व्यक्ति आ जाए तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाती है, ख़ास निगाहें राखी जाती है। वहीँ पाकिस्तान तो हिन्दुस्तानियों को सीधे जेल में डाल देता है। इतना सब कुछ होने के बाद भी भारत पाकिस्तान से आये कई लोगों को अपने देश की नागरिकता दे रहा है।

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जानकारी के अनुसार, पाकिस्‍तान से विस्‍थापित होकर भारत में शरण लेने वाले 82 नागरिकों को केंद्र सरकार ने भारतीय नागरिकता प्रदान की है। इस बारे में गृह मंत्रालय ने लोकसभा में जानकारी दी। पाकिस्तानों को अपने देश में पनाह देने के सवालों का जवाब देते हुए गृह मंत्रालय की ओर से कहा गया कि केंद्र सरकार ने नाग‍रिकता अधिनियम 1955 की धारा 16 के प्रावधानों के तहत पाकिस्‍तान से विस्‍थापित होकर आए 82 नागरिकों को भारत की नागरिकता प्रदान की है। इस अधिकार का प्रयोग पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए कानूनी प्रवासियों पर ही किया जा सकेगा। जिन छह अल्‍पसंख्‍यक समुदाय को भारतीय नागरिकता प्रदान करने की अनुमति दी गई है, उसमें हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोग शामिल हैं।

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गृह मंत्रालय ने आगे बताया कि केंद्र सरकार ने नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 16 में उल्‍लेखित शक्तियों का प्रयोग करते हुए राजस्‍थान के गृह सचिव और 16 जिलों के कलेक्‍टर्स को विशेष अधिकार दिए गए हैं। जिन 16 जिला कलेक्‍टर्स को यह अधिकार मिले हैं, उसमें जोधपुर, जैसलमेर और जयपुर के जिला कलेक्‍टर भी शामिल हैं। मंत्रालय ने अपने लिखित जवाब में बताया है कि 31 दिसंबर 2018 तक उपलब्‍ध आंकड़ों के अनुसार 41331 पाकिस्‍तानी और 4193 अफगानिस्‍तान के अल्‍पसंख्‍यक नागरिक लंबे समय से भारत के विभिन्‍न इलाकों में रह रहे हैं। विशेष अधिकारों के तहत, इन अधिकारियों को छह अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े कानूनी प्रवासियों का पंजीकरण कर भारतीय नागरिकता प्रदान करने का अधिकार दिया गया है।

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