अब भारत भी रहेगा ‘खुश’

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औद्योगिकी से लेकर मानव संसाधन तक भारत हर क्षेत्र में अग्रणी है, लेकिन हमारे देश में ख़ुशी के मानक को ज्यादा तवज्जो नहीं दी जाती है| देश के आर्थिक विकास के साथ-साथ मानव विकास भी एक महत्वपूर्ण मानक है|

मानव विकास के ज्यादातर मानकों पर बढ़िया रिकॉर्ड रखने वाले नॉर्वे, फिनलैंड, डेनमार्क, आइसलैंड जैसे देशों से भारत ‘खुशहाली’ के गुर सीखेगा| प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वीडन दौरे में भारत-नार्डिक शिखर सम्मेलन के दौरान इन देशों के साथ कचरा प्रबंधन, स्टार्टअप, शिक्षा, दुग्ध उत्पादन, मछली पालन, किसान कल्याण, स्थानीय प्रशासन जैसे विषयों पर सहयोग को लेकर सहमति बनी है|

नॉर्वे, डेनमार्क, फिनलैंड और आइसलैंड नार्डिक देशों में शामिल हैं| इन देशों में अच्छी व्यवस्था होने के साथ-साथ ये दुनिया के सबसे खुशहाल देशों में आते हैं| इन देशों का नाम मानवाधिकार, जीवनशैली, बराबरी, महिला अधिकार, मानव विकास, अपराध नियंत्रण, न्याय प्रणाली, प्रशासनिक तंत्र जैसे दर्जनों सूचकांकों में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले देशों में अग्रणी है| विभिन्न विशेषज्ञ इन क्षेत्रों में भारत के रिकॉर्ड में सुधार की जरूरत बताते रहे हैं और जोर देते रहे हैं कि भारत इन देशों से बहुत कुछ सीख सकता है|

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