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पाकिस्तान कर रहा ‘‘आस्था के नाम पर कारोबार’

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इन दिनों पाकिस्तान भयंकर मंदी की मार झेल रहा है. साथ ही कर्ज के बोझ तले दबा जा रहा है जिससे अब कोई भी देश उसे कर्ज देने के लिए भी तैयार नहीं हो रहा है. अब पाकिस्तान की हालत यह है की वह किसी और देश से आर्थिक स्त्रोत के लिए कुछ भी कर सकता है। सिक्खों के पवित्र धार्मिक स्थल करतारपुर कॉरिडोर जाने के लिए उसने भारत से 20 डॉलर की मांग की है. भारत की ओर से इस मांग को मानने के संकेत दिखाई दे रहे है।

जानकारी के अनुसार अब भारत की ओर से पाकिस्तान स्थित करतारपुर साहिब गुरुद्वारा (Gurdwara Darbar Sahib Kartarpur) जाने के लिए हर श्रद्धालु को करीब 1420 रुपये की फीस देनी होगी. पाकिस्तान लंबे समय से इस फीस के लिए अड़ा हुआ था लेकिन भारत (India) ने श्रद्धा को पैसों से अलग रखने की सलाह पाकिस्तान को दी थी. पाकिस्तान (Pakistan) इस पर राजी नहीं हुआ है.

इससे पहले केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल (Harsimrat Kaur Badal) ने करतारपुर साहिब गुरुद्वारा के दर्शनार्थ जाने वाले भारतीय श्रद्धालुओं (Pilgrims) से सेवा शुल्क के रूप में 20 डॉलर वसूल करने पर अड़े रहने के लिए पाकिस्तान की निंदा करते हुए कहा है कि पड़ोसी देश ‘‘आस्था के नाम पर कारोबार’’ कर रहा है. हरसिमरत ने ट्वीट किया, ‘‘पाकिस्तान द्वारा करतारपुर साहिब के दर्शन के लिए 20 डॉलर प्रति व्यक्ति शुल्क लगाया जाना घटियापन है. गरीब श्रद्धालु कैसे यह रकम देगा? पाकिस्तान ने आस्था के नाम पर कारोबार किया है. (पाकिस्तान के प्रधानमंत्री) इमरान खान (Imran Khan) का यह बयान बेहद शर्मनाक है कि यह शुल्क पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था (Economy) को मजबूत करेगा और इससे विदेशी मुद्रा प्राप्त होगी.’’

-Mradul tripathi

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